Sunday, June 14, 2026
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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में तेज बारिश और आंधी का कहर, सात लोगों की मौत

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इस्लामाबाद, 14 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पिछले 24 घंटों के दौरान तेज हवा, बिजली गिरने और भारी बारिश के कारण हुए हादसों में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 33 लोग घायल हो गए।

पाकिस्तान के समाचार चैनल जियो न्यूज के अनुसार, प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (पीडीएमए) की रिपोर्ट के मुताबिक, बन्नू, शांगला और मानसेहरा जिलों में हुई इन घटनाओं में मरने वालों में चार पुरुष, एक महिला और दो बच्चे शामिल हैं। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण कई घरों की दीवारें और छतें गिर गईं, जिससे ये हादसे हुए।

पाकिस्तान मौसम विभाग ने कहा है कि रविवार को ऊपरी खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के कई इलाकों में और बारिश होने की संभावना है। विभाग के अनुसार, पाकिस्तान के बाकी हिस्सों में मौसम गर्म और शुष्क रहने की उम्मीद है।

पिछले सप्ताह प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान में हाल ही में आए तूफानों और बारिश का यह दौर पहले से अनुमानित था, फिर भी इसने तैयारियों और वास्तविक कार्रवाई के बीच की कमी को उजागर कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार होने वाली ऐसी परेशानियां दिखाती हैं कि अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

‘ईट्रुथ एमवी’ की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) ने पहले ही इस बारिश और आंधी-तूफान के दौर की चेतावनी जारी कर दी थी और कई क्षेत्रों को अलर्ट पर रखा था। 12 से 17 अप्रैल के बीच पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाला गिलगित-बाल्टिस्तान को संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया था। चेतावनियां समय पर और जिला-स्तर पर जारी की गई थीं, लेकिन इसके बावजूद जो नुकसान हुआ, उसने यह दिखाया कि सिर्फ जानकारी होना ही पर्याप्त नहीं है; उसे प्रभावी तैयारी में बदलना भी जरूरी है।

चित्राल और स्वात जैसे संवेदनशील इलाकों के साथ-साथ लाहौर और रावलपिंडी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों की पहचान भी पहले से कर ली गई थी। मौसम संबंधी ये अनुमान बारिश की तीव्रता, हवा की गति और संभावित खतरों की जानकारी देते हैं, जिससे प्रशासन पहले से संसाधन जुटाकर और योजनाएं बनाकर नुकसान कम कर सकता है।

‘ईट्रुथ एमवी’ की रिपोर्ट में कहा गया, “मौसमी तूफानों से निपटने के मामले में पाकिस्तान एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती का सामना कर रहा है। मौसम संबंधी अनुमान पहले से कहीं अधिक सटीक हो चुके हैं, जोखिम भी अच्छी तरह समझे जा चुके हैं और संस्थागत व्यवस्थाएं भी मौजूद हैं। इसके बावजूद नतीजों में कोई खास बदलाव दिखाई नहीं देता।”