Wednesday, June 17, 2026
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किशाऊ परियोजना से हिमाचल को हर साल मिलेगी 100 करोड़ यूनिट बिजली: सीएम सुक्खू

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शिमला, 16 जून (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि वर्षों से लंबित किशाऊ बहु उद्देशीय बांध परियोजना को लेकर बड़ी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में परियोजना से जुड़े आठ वर्ष पुराने वित्तीय विवाद का समाधान निकल आया है, जिससे 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 15,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना टौंस नदी पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित है। लंबे समय से परियोजना के वित्तीय ढांचे और लागत वहन को लेकर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी, जिसके कारण इसका कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

नई दिल्ली में आयोजित बैठक में सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के हितों की मजबूती से पैरवी करते हुए राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न डालने की मांग रखी। बैठक में भारत सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई कि परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले राज्य दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक पर आने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वहन करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे प्रदेश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम होगा। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने परियोजना में राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपए देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित संसाधनों को देखते हुए इसे स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने कहा कि जब परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करा रही है, तो विद्युत घटक के लिए भी इसी प्रकार की सहायता मिलनी चाहिए थी। राज्य सरकार ने इसी मुद्दे को मजबूती से उठाया और उसे सफलता मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना से सबसे अधिक विस्थापन और भौगोलिक प्रभाव हिमाचल प्रदेश पर पड़ेगा। ऐसे में राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में हिमाचल प्रदेश के योगदान को देखते हुए राज्य को उचित प्रतिपूर्ति मिलनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि परियोजना के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश को विद्युत घटक के रूप में प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 600 करोड़ रुपए सालाना होगी, जिससे राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा प्रदेश और प्रदेशवासियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने इस निर्णय को बिजली परियोजनाओं में हिमाचल के अधिकारों, लंबित वित्तीय दावों और राज्य हितों की लड़ाई में बड़ी जीत बताया।