Thursday, June 25, 2026
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असम: शिक्षा विभाग ने स्कूलों में ‘भारतीय भाषा समर कैंप’ शुरू किया

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गुवाहाटी, 24 जून (आईएएनएस)। असम के एलिमेंट्री एजुकेशन निदेशालय (डीईई) ने राज्य भर के सभी डिस्ट्रिक्ट एलिमेंट्री एजुकेशन ऑफिसर्स को निर्देश दिया है कि वे नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 के तहत स्कूलों में ‘भारतीय भाषा समर कैंप’ (बीबीएससी)-2026 को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

एलिमेंट्री एजुकेशन निदेशालय की एक आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस पहल का मकसद एनईपी के लक्ष्यों के अनुरूप छात्रों के बीच बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना और भाषाई विविधता को मजबूत करना है।

डीईई ने जिला-स्तरीय शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि वे यह सुनिश्चित करें कि यह कार्यक्रम उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्कूलों में आयोजित और संचालित किया जाए। सूचना में कहा गया है कि यह कवायद स्कूल शिक्षा विभाग और संबंधित सरकारी अधिकारियों से मिले निर्देशों के अनुसार की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि ‘भारतीय भाषा समर कैंप’ का मकसद छात्रों को अलग-अलग भारतीय भाषाओं को सीखने और उनकी अहमियत समझने के लिए प्रोत्साहित करना है, साथ ही सांस्कृतिक समझ और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है। यह प्रोग्राम एनईपी 2020 के तहत स्कूली बच्चों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देने और भाषा सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है।

डायरेक्टरेट ने कैंप को लागू करने के लिए जिलों को विस्तृत गाइडलाइंस और जरूरी दस्तावेज भेजे हैं। जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्कूलों के साथ तालमेल बिठाएं और यह पक्का करें कि गतिविधियां तय ढांचे के अनुसार ही हों।

अधिकारियों ने बताया कि इस पहल से छात्रों को भाषा-आधारित गतिविधियों, इंटरैक्टिव लर्निंग सेशन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में शामिल होने के मौके मिलने की उम्मीद है। इन गतिविधियों को भारत की भाषाई विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 बहुभाषी शिक्षा पर काफी जोर देती है और सीखने की शुरुआती स्टेज में ही कई भारतीय भाषाओं से परिचित होने को बढ़ावा देती है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि समर कैंप की पहल इन लक्ष्यों के अनुरूप है और इसका मकसद छात्रों में भारत की समृद्ध भाषाई परंपराओं के प्रति ज्यादा दिलचस्पी पैदा करना है।

उम्मीद है कि राज्य शिक्षा विभाग पूरे असम के जिलों और स्कूलों से मिलने वाली रिपोर्ट के जरिए इस प्रोग्राम के लागू होने की निगरानी करेगा।