रांची, 25 जून (आईएएनएस)। झारखंड के बोकारो जिले से करीब 11 महीने पहले लापता हुई 18 वर्षीय युवती पुष्पा कुमारी के मामले में गुरुवार को झारखंड हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। अदालत को बताया गया कि कोलकाता स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) की जांच रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान बरामद किए गए कंकाल के दांत से प्राप्त डीएनए नमूने का मिलान पुष्पा के डीएनए प्रोफाइल से हुआ है।
हालांकि, पूरे कंकाल का डीएनए अभी तक उसके माता-पिता के डीएनए से पूरी तरह मेल नहीं खाया है। यह मामला बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र का है। यहां की रहने वाली पुष्पा कुमारी 31 जुलाई 2025 को अचानक लापता हो गई थी। लंबे समय तक उसका कोई सुराग न मिलने पर उसकी मां रेखा देवी ने झारखंड हाई कोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर कर बेटी की बरामदगी की मांग की थी।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर दिनेश कुमार महतो नामक युवक को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में युवती की हत्या करने की बात स्वीकार की थी। उसकी निशानदेही पर एक स्थान से नरकंकाल बरामद किया गया था।
पुष्पा के परिजनों ने शुरू से ही इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि बरामद कंकाल उनकी बेटी का नहीं है। इसी विवाद को देखते हुए हाई कोर्ट के निर्देश पर कंकाल और युवती के परिजनों के डीएनए नमूने कोलकाता की सीएफएसएल लैब भेजे गए थे। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत को जांच रिपोर्ट की जानकारी दी गई। सुनवाई के दौरान विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्य भी अदालत में मौजूद थे।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत में इस मामले से संबंधित चल रही कार्रवाई की जानकारी मांगी है। साथ ही राज्य सरकार से पूछा है कि जांच में कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने पुलिस को बरामद कंकाल से संबंधित पंचनामा और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने का निर्देश भी दिया।
वहीं, अदालत को बताया गया कि पुष्पा के परिजन अब भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि बरामद कंकाल उनकी बेटी का है। हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों और कानून के प्रावधानों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करे। मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

