कोलकाता, 25 जून (आईएएनएस)। तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम की छत गिरने की घटना खराब निर्माण, घटिया सामग्री और गलत योजना का नतीजा थी। ये बातें कोलकाता नगर निगम की उस रिपोर्ट में कही गई हैं, जो गुरुवार को निगम आयुक्त को सौंपी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, 54 कट्ठा जमीन पर निर्माण का नक्शा फरवरी 2025 में मंजूर किया गया था, जिसके बाद वहां तीन मंजिला इमारत बनाई गई। नियमों के मुताबिक, लोहे की कास्टिंग का काम पहली मंजिल से शुरू होना चाहिए था, लेकिन इस गोदाम में कास्टिंग का काम तीसरी मंजिल से शुरू किया गया। निर्माण ढांचा इतना भार नहीं झेल सका।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कास्टिंग में इस्तेमाल की गई सामग्री भी घटिया गुणवत्ता की थी।
तीन मंजिला ढांचा बिना नींव और निचले हिस्से को पर्याप्त मजबूत किए खड़ा कर दिया गया था, जिसके कारण गुरुवार दोपहर यह हादसा हुआ।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निर्माण का नक्शा 54 में से केवल 43 कट्ठा जमीन के लिए मंजूर किया गया था।
हादसे के बाद जांच में पता चला कि निर्माण कार्य मंजूर नक्शे से अधिक (अतिरिक्त 5 कट्ठा जमीन पर) किया जा रहा था। बिल्डरों ने अवैध रूप से गोदाम का आकार बढ़ा लिया था।
भवन विभाग द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल निर्माण डिजाइन में कोई गलती नहीं थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की निगरानी में लापरवाही हुई।
भवन विभाग ने रिपोर्ट में यह भी कहा है कि कर्मचारियों की कमी के कारण ऐसे निर्माण कार्यों की निगरानी प्रभावित होती है।
कोलकाता के तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत गिरने से 9 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 20 लोग घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।
अब तक इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं (गैर-इरादतन हत्या और गैर-इरादतन हत्या के प्रयास की धाराएं शामिल हैं) के तहत स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज की है।
इस घटना की जांच के लिए कोलकाता पुलिस ने एक विशेष जांच दल भी गठित किया है।

