Friday, June 26, 2026
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गुजरात में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में जबरदस्त उछाल, सरकारी नीतियों का दिख रहा असर

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गांधीनगर, 25 जून (आईएएनएस)। गुजरात में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को लेकर लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। राज्य सरकार की प्रोत्साहनकारी नीतियों, टैक्स में छूट, सब्सिडी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते दोपहिया और चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कम संचालन लागत, पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता में कमी और शून्य कार्बन उत्सर्जन जैसे कारणों से इलेक्ट्रिक वाहन अब लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन न केवल किफायती परिवहन का साधन हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि गुजरात में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ईवी बाजार लगातार विस्तार कर रहा है और अब लगभग सभी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां अपने इलेक्ट्रिक मॉडल बाजार में उतार रही हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन खरीदार मानित शाह का कहना है कि ईवी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे प्रदूषण नहीं होता है। आजकल अधिकांश घरों में सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करना और भी किफायती हो गया है। उन्होंने दावा किया कि ईवी न केवल खर्च कम करते हैं बल्कि प्रकृति के संरक्षण में भी योगदान देते हैं।

एक अन्य खरीदार पंकित शाह ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों में आरटीओ पंजीकरण शुल्क काफी कम होता है, जिससे वाहन खरीदने की कुल लागत घट जाती है। चार्जिंग के जरिए चलने वाले वाहन पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों की तुलना में अधिक लाभदायक साबित हो रहे हैं और लंबी अवधि में उपभोक्ताओं की अच्छी-खासी बचत कराते हैं।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में हरित विकास (ग्रीन इनिशिएटिव्स) को विशेष महत्व दिया है। सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। राज्य सरकार की ओर से दी जा रही सब्सिडी, टैक्स में छूट और चार्जिंग स्टेशनों के विस्तार ने मध्यम वर्ग के बीच ईवी को लेकर उत्साह बढ़ाया है। इसके परिणामस्वरूप इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को वाहन की श्रेणी के अनुसार लगभग 30 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक की बचत हो रही है।

गांधीनगर स्थित फेडरेशन ऑफ ऑटो डीलर्स एसोसिएशन के प्रमुख प्रणव शाह के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली कर छूट ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है। उन्होंने बताया कि सामान्य वाहनों में जहां रजिस्ट्रेशन शुल्क 60 हजार रुपए तक पहुंच जाता है, वहीं इलेक्ट्रिक कारों में यह शुल्क करीब 10 हजार रुपए तक सीमित रहता है। इस तरह ग्राहकों को औसतन 50 हजार रुपए का सीधा फायदा मिलता है।

उन्होंने बताया कि दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों में भी रजिस्ट्रेशन शुल्क नाममात्र का होता है। इसके अलावा अहमदाबाद समेत कई नगर निगम क्षेत्रों में पारंपरिक वाहनों पर लगने वाला रोड टैक्स 2.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत तक होता है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इसे पूरी तरह माफ कर दिया गया है। केवल 25 रुपए का टोकन शुल्क लिया जाता है, जिससे ग्राहकों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलता है।

प्रणव शाह के अनुसार, प्रधानमंत्री द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों की खपत कम कर विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की अपील के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। ईवी से संबंधित पूछताछ में 200 से 300 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

बिक्री के आंकड़े भी इस बढ़ते रुझान की पुष्टि करते हैं। पिछले वर्ष गुजरात में पूरे साल के दौरान लगभग 5,545 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हुआ था, जबकि इस वर्ष केवल पहले क्वार्टर में ही 8,577 वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। यह लगभग 55 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है, जो राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के तेजी से विस्तार का संकेत है।

कुछ वर्ष पहले तक गुजरात में सीमित कंपनियों के इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध थे, लेकिन अब लगभग सभी प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां अपने इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च कर रही हैं। इससे ग्राहकों को कीमत, फीचर्स और रेंज के आधार पर कई विकल्प मिल रहे हैं। कुल मिलाकर, कम परिचालन लागत, सरकारी प्रोत्साहन, कर छूट, बेहतर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और शून्य कार्बन उत्सर्जन जैसी विशेषताओं के कारण इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य की परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहे हैं।