कोच्चि, 26 जून (आईएएनएस)। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक ‘मासप्पड़ी’ (मासिक भुगतान) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) को वर्ष 2017 से 2020 के दौरान एलडीएफ सरकार से कोई विशेष लाभ या रियायत मिली थी।
इसी कड़ी में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीणा विजयन से कोच्चि स्थित ईडी कार्यालय में 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। माना जा रहा है कि उन्हें जल्द ही तीसरी बार भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, ईडी यह जांच कर रही है कि सीएमआरएल द्वारा वीणा विजयन की आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को किए गए कथित मासिक भुगतान का संबंध उस समय राज्य सरकार की ओर से कंपनी को मिली किसी रियायत या सरकारी लाभ से था या नहीं। एजेंसी को एक्सालॉजिक और सीएमआरएल के बीच हुए कंसल्टेंसी समझौते पर भी संदेह है। जांच की जा रही है कि कहीं यह किसी बड़े ‘क्विड प्रो क्वो’ (लेन-देन के बदले लाभ) का हिस्सा तो नहीं था।
वीणा विजयन गुरुवार को दूसरी बार ईडी के सामने पेश हुईं। केरल हाईकोर्ट द्वारा आगे की जांच की अनुमति मिलने के बाद उन्हें नया समन जारी किया गया था। वह सुबह करीब 9:30 बजे अपने पति और केरल सरकार में मंत्री पी. ए. मोहम्मद रियास के साथ ईडी कार्यालय पहुंचीं। वहां उनसे 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। संभावना है कि उन्हें दोबारा भी बुलाया जा सकता है।
यह पूछताछ ऐसे समय हुई है, जब ईडी को कोच्चि स्थित कंपनी कोर्ट से गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की चार्जशीट से जुड़े 134 एनेक्सचर (संलग्न दस्तावेज) प्राप्त हुए हैं। सीएमआरएल ने इन दस्तावेजों को सौंपने का विरोध किया था, लेकिन अदालत ने उसकी आपत्ति खारिज कर दी। अब ईडी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
सूत्रों का कहना है कि ईडी ने वीणा विजयन से सिर्फ एक्सालॉजिक और सीएमआरएल के बीच हुए वित्तीय लेन-देन पर ही नहीं, बल्कि इस आरोप पर भी सवाल किए कि वर्ष 2017 से 2020 के दौरान सीएमआरएल को विशेष लाभ मिले थे। हालांकि, वीणा विजयन ने जांच एजेंसी से कहा कि एक्सालॉजिक को मिला कंसल्टेंसी कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह वैध था और उसमें कोई अनियमितता नहीं थी। फिलहाल ईडी उनके इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं बताई जा रही है।
यह मामला आयकर निपटान आयोग की उन टिप्पणियों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया था कि सीएमआरएल ने वर्ष 2017 से 2020 के बीच एक्सालॉजिक को कंसल्टेंसी शुल्क के नाम पर 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जबकि कथित तौर पर इसके बदले कोई आईटी सेवा नहीं ली गई।
इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर एसएफआईओ ने जांच शुरू की थी। बाद में ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। पहली पूछताछ के दौरान भी वीणा विजयन से एक्सालॉजिक द्वारा दी गई सेवाओं का ब्योरा और उससे जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे। जांच के तहत ईडी ने उनके एचडीएफसी बैंक के लॉकर का भी निरीक्षण किया था।

