Friday, June 26, 2026
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अदाणी यूनिवर्सिटी ने एआई के दौर में पाठ्यक्रम बदला, इंडस्ट्री-केंद्रित लर्निंग पर फोकस

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अहमदाबाद, 26 जून (आईएएनएस)। अदाणी यूनिवर्सिटी ने शुक्रवार को 2026-27 शैक्षणिक वर्ष के लिए अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रम में बड़े बदलावों की घोषणा की। नए पाठ्यक्रम में एआई-केंद्रित लर्निंग, इंडस्ट्री के अनुभव और व्यापर विकास पर अधिक फोकस किया जाएगा।

इसकी वजह भारत के साथ वैश्विक स्तर पर इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग बढ़ना है।

संशोधित पाठ्यक्रम में इंजीनियरिंग, विज्ञान और मैनेजमेंट के प्रोग्राम शामिल हैं। इसका मकसद छात्रों को भविष्य के लिए जरूरी स्किल्स के साथ तैयार करना है, साथ ही तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ मानवीय मूल्यों और व्यावहारिक अनुभव के बीच संतुलन बनाना भी है।

संशोधित पाठ्यक्रम की एक मुख्य बात ‘एआई फॉर इंजीनियर्स’ नाम का एक अनिवार्य कोर्स शुरू करना है, जो सभी इंजीनियरिंग और साइंस के छात्रों के लिए उपलब्ध होगा। यह कोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और एथिकल एआई प्रैक्टिस की बुनियादी समझ देगा।

यूनिवर्सिटी ने एआई-आधारित वर्कप्लेस के लिए छात्रों को तैयार करने के मकसद से कई विषयों में एआई कॉन्सेप्ट और उनके इस्तेमाल को भी शामिल किया है।

फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज ने अपने मुख्य एमबीए इन इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट प्रोग्राम को भी नए सिरे से डिजाइन किया है। नए सिलेबस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एनालिटिक्स, एनवायरनमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ईएसजी) प्रिंसिपल्स और इंडियन नॉलेज सिस्टम्स जैसे नए विषय शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, इस प्रोग्राम में इंटर्नशिप और कैपस्टोन प्रोजेक्ट्स के जरिए क्षेत्र विशेष स्पेशलाइजेशन और प्रैक्टिकल लर्निंग के अधिक मौके भी मिलेंगे।

अदाणी यूनिवर्सिटी के अनुसार, यह नया पाठ्यक्रम भारत और विदेशों के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ तुलनात्मक अध्ययन (बेंचमार्किंग) और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स व शिक्षाविदों के साथ बातचीत के बाद तैयार किया गया है। ये बदलाव नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 के अनुरूप हैं और इनका मकसद रोजगार की क्षमता बढ़ाना, इनोवेशन को बढ़ावा देना और छात्रों का व्यापक विकास करना है।

आधुनिक शिक्षा में भारतीय विरासत को शामिल करने की अपनी कोशिशों के तहत, अदाणी यूनिवर्सिटी ने अपने शैक्षणिक ढांचे में ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम्स’ को एक जरूरी क्रेडिट-बेस्ड कोर्स और विषय-विशिष्ट मॉड्यूल के जरिए शामिल किया है। इन कोर्स को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि छात्र भारत की वैज्ञानिक परंपराओं, दार्शनिक विचारों, नैतिकता और सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) से जुड़ी प्रथाओं को जान सकें।

यूनिवर्सिटी ने प्रोजेक्ट-बेस्ड शिक्षा, लैब वर्क और इंडस्ट्री के साथ जुड़ाव पर अधिक जोर देकर अनुभव-आधारित शिक्षा को भी मजबूत किया है। अब छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान तीन तरह की व्यवस्थित इंटर्नशिप करेंगे: पहले साल के बाद कम्युनिटी सर्विस इंटर्नशिप, दूसरे साल के बाद प्रोफेशनल डेवलपमेंट इंटर्नशिप और तीसरे साल के बाद इंडस्ट्री इंटर्नशिप।

इसके अलावा, छात्रों को मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (एमओओसीएस), अलग-अलग विषयों के इलेक्टिव कोर्स और अपने मुख्य प्रोग्राम के साथ माइनर डिग्री करने के मौकों के जरिए सीखने के ज्यादा लचीले रास्ते मिलेंगे। रोबोटिक्स, वीएलएसआई डिजाइन और फाइनेंशियल डेटा एनालिटिक्स जैसे उभरते हुए क्षेत्रों को माइनर स्पेशलाइजेशन के तौर पर शुरू किया गया है।

प्रैक्टिकल लर्निंग को और बेहतर बनाने के लिए, यूनिवर्सिटी ने आईआईटी बॉम्बे के ई-यंत्र द्वारा तैयार किए गए प्रोजेक्ट-बेस्ड कोर्स को शामिल किया है, जो हार्डवेयर डेवलपमेंट और सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग पर केंद्रित हैं। कुछ खास प्रोग्राम में ‘स्टूडियो लर्निंग’ मॉड्यूल भी शुरू किए गए हैं ताकि छात्र पहले साल से ही खुद समस्याओं को हल करने (हैंड्स-ऑन प्रॉब्लम-सॉल्विंग) का अनुभव ले सकें।