Friday, June 26, 2026
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महाराष्ट्र: 21 साल पुराना मर्डर केस सुलझा, दोस्त की हत्या कर फरार आरोपी प्रयागराज से गिरफ्तार

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मुंबई, 26 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र की वसई क्राइम ब्रांच ने हत्या के 21 वर्ष पुराने एक मामले को सफलतापूर्वक सुलझाते हुए आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। दरअसल, करीब 21 वर्षों से अनसुलझे पड़े हत्या के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए मीरा-भाईंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच यूनिट- 2) ने फरार आरोपी को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से गिरफ्तार किया।

पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक के निर्देश पर पुराने अनसुलझे हत्या के मामलों की दोबारा जांच के दौरान इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। आरोपी ने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार करते हुए हत्या की वजह भी बताई है।

मामले को लेकर मदन बल्लाल (एसीपी, मीरा भायंदर वसई विरार पुलिस आयुक्तालय) ने बताया कि 27 दिसंबर 2005 को विरार पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 283/2005 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता रत्नाकर शंकर चव्हाण (51) निवासी अर्नाला बंदरपाड़ा, किला रोड, वसई ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके चचेरे भाई दिलीप तुकाराम चव्हाण (30) की अज्ञात हमलावर ने सिर पर किसी धारदार हथियार से गंभीर वार कर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद शव को सबूत मिटाने की नीयत से आगाशी-भाटीबंदर गांव की सीमा में खाड़ी किनारे फेंक दिया गया था।

मामले की पुनः जांच के दौरान क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने शिकायतकर्ता और पुराने गवाहों से विस्तृत पूछताछ की। गुप्त सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पता चला कि आरोपी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में अपने पैतृक गांव में छिपकर रह रहा है। इसके बाद पुलिस टीम उत्तर प्रदेश रवाना हुई और 25 जून को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजेश सुरेश सोनकर (41) निवासी तलोंगज मनोरी, तहसील पुरामुप्ती, जिला प्रयागरा के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह और दिलीप चव्हाण मित्र थे तथा दोनों अर्नाला स्थित अर्नाला हिंदू होटल में सफाई का काम करते थे।

आरोपी के अनुसार, दिलीप के एक परिचित व्यक्ति ने उसकी पत्नी का रेप किया था और उसे संदेह था कि इस घटना में दिलीप ने उस व्यक्ति की मदद की थी। इसी रंजिश के चलते उसने अपने मित्र की हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी पहले 5 से 6 वर्ष लखनऊ में रहा और फिर पिछले लगभग 15 वर्षों से प्रयागराज में अपनी पहचान छिपाकर ई-रिक्शा चलाकर जीवनयापन कर रहा था।

यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक, अपर पुलिस आयुक्त संजय शिंत्रे, पुलिस उपायुक्त (अपराध) संदीप डोईफोडे तथा सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) मदन बल्लाल के मार्गदर्शन में की गई। अभियान का नेतृत्व क्राइम ब्रांच यूनिट-2 वसई के पुलिस निरीक्षक अविराज कुराडे ने किया।

टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक सोपान पाटील, पुलिस उपनिरीक्षक संतोष घाडगे, अजित गिते, संजय नवले, मुकेश पवार, मनोज मोरे, चंदन मोरे, प्रफुल्ल पाटील, सचिन पाटील, जगदीश गोवारी, दादा आडके, अनिल साबले, अक्षय बांगर, रामेश्वर केकान सहित क्राइम ब्रांच यूनिट-2 के अधिकारी-कर्मचारी तथा साइबर पुलिस स्टेशन के संतोष चव्हाण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।