Wednesday, July 1, 2026
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उत्तराखंड: खत्म होगा मदरसा बोर्ड, 1 जुलाई से ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ संभालेगा जिम्मेदारी

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देहरादून, 30 जून (आईएएनएस)। शिक्षा नीति में एक बड़े बदलाव के तहत उत्तराखंड सरकार ने मौजूदा उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का फैसला किया है। इसकी जगह अब ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ काम करेगा। मदरसा बोर्ड मंगलवार रात 12 बजे के बाद अस्तित्व में नहीं रहेगा, जबकि नया प्राधिकरण 1 जुलाई से अपना कामकाज शुरू कर देगा।

इस बड़े बदलाव से पहले उत्तराखंड के विशेष सचिव पराग मधुकर धाकाते ने कहा कि नए नियम 1 जुलाई से लागू हो जाएंगे। इसके तहत राज्य के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में आ जाएंगे।

उन्होंने कहा कि बुधवार से सभी अल्पसंख्यक संस्थान नई व्यवस्था के तहत काम करना शुरू कर देंगे। इससे अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को आधुनिक शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे।

नए नियमों के अनुसार, मदरसों को पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए जुलाई 2026 से उत्तराखंड बोर्ड के पाठ्यक्रम को अपनाना होगा।

इस नए पाठ्यक्रम में विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान जैसे आधुनिक विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो संस्थान इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है और उन्हें बंद भी किया जा सकता है।

इस फैसले का विभिन्न वर्गों, विशेषकर समुदाय के शिक्षित लोगों और विद्वानों ने स्वागत किया है।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने नई व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि इससे मदरसों से पढ़कर निकलने वाले छात्रों को अन्य छात्रों के समान अवसर मिलेंगे और वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्षम और दक्ष बन सकेंगे।

शादाब शम्स ने कहा, “1 जुलाई से मदरसा शिक्षा बोर्ड पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और उसकी जिम्मेदारियां उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण संभालेगा। मदरसा शिक्षा बोर्ड अप्रभावी हो गया था और मुस्लिम बच्चों की शिक्षा के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा था। उसका पाठ्यक्रम इतना पुराना और जटिल था कि आम व्यक्ति के लिए उसे समझना भी मुश्किल था। नई व्यवस्था का उद्देश्य मदरसा शिक्षा में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार लाना है।”