सियोल, 2 जुलाई (आईएएनए)। मई में सियोल के उत्तर में रात के समय हुई एक ड्रिल के दौरान एक रिजर्व सैनिक की मौत के बाद दक्षिण कोरियाई सेना ने गुरुवार को नियमित रिजर्व सैनिक ट्रेनिंग के लिए सुरक्षा और मेडिकल उपायों को और बेहतर बनाने का संकल्प लिया।
इस मामले की गहन जांच के बाद सेना ने कहा कि 20-30 साल की उम्र के रिजर्व सैनिक की मौत ट्रेनिंग से अलग, पहले से मौजूद मेडिकल समस्याओं के कारण हुई थी, लेकिन साथ ही उन्होंने ऐसी ड्रिल के लिए सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाने की कोशिश करने का वादा भी किया।
13 मई को सियोल से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर में पोचेओन में तीन दिन की रिजर्व सैनिक ट्रेनिंग के दौरान एक रिजर्व सैनिक रात की ट्रेनिंग वाली जगह पर जाते समय बेहोश हो गया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद रिजर्व सैनिक ट्रेनिंग के पूरे मैनेजमेंट की बड़े पैमाने पर आलोचना हुई और ऐसी अटकलें लगने लगीं कि इंस्ट्रक्टर ने अलग-अलग प्रतिभागियों की सेहत का ध्यान रखे बिना ही ड्रिल जारी रखी।
सेना ने कहा कि जांच में पता चला है कि रिजर्व सैनिक की मौत पैंक्रियाटाइटिस के कारण हुई थी, जो पहले से मौजूद एक बीमारी थी और जिसका इलाज वह लंबे समय से करवा रहा था।
सेना के एक अधिकारी ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “हमने दो स्वतंत्र फोरेंसिक कंसल्टेशन एजेंसियों से प्रोफेशनल राय मांगी थी और इस बात की पुष्टि हुई है कि पहले से मौजूद मेडिकल समस्या का सीधा संबंध मौत के कारण से था।”
अधिकारी ने रिजर्व सैनिक की मौत से जुड़ी कई अफवाहों को खारिज कर दिया, जिसमें यह अटकल भी शामिल थी कि डिवीजन कमांडर सैनिकों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कहा कि ड्रोन का इस्तेमाल आपातकालीन स्थितियों का अभ्यास करने के लिए किया गया था।
हालांकि यह तय हो गया कि मौत का ट्रेनिंग से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन सेना ने कहा कि वह इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को रिजर्व सैनिकों की ट्रेनिंग में सुधार के लिए एक अहम मोड़ के तौर पर लेगी।
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सभी रिजर्व ट्रेनिंग ग्राउंड पर स्थायी रूप से आपातकालीन मेडिकल टीमें तैनात की जाएंगी। साथ ही, बड़े पैमाने पर आउटडोर ट्रेनिंग के लिए संबंधित डिवीजन और आस-पास की यूनिट्स से उपलब्ध मेडिकल स्टाफ को इकट्ठा किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिस करने वालों की भी मदद ली जाएगी।
सेना ने एक बयान में कहा, “हम इस साल के अंत तक एक ऐसा सिस्टम पूरी तरह से लागू करने के लिए काम करेंगे जिससे यह पक्का हो सके कि अहम ‘गोल्डन आवर’ के दौरान बेहतर आपातकालीन मेडिकल सुविधा मिल सके।”

