Tuesday, July 7, 2026
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सुपारी तस्करी सिंडिकेट मामले में ईडी का एक्शन, चार राज्यों में 20 ठिकानों पर छापेमारी

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दिसपुर, 6 जुलाई (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने 3 जुलाई को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत असम, मिजोरम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में 20 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई सुपारी की भारत-म्यांमार सीमा के पार तस्करी और उससे हुई कमाई को लॉन्डर करने (अवैध धन को वैध बनाने) में शामिल एक बड़े, संगठित सिंडिकेट की जांच के सिलसिले में की गई।

यह मामला असम के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है, जिनमें आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं और कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत सुपारी की अवैध तस्करी और कस्टम्स ड्यूटी की चोरी से जुड़े अपराध शामिल हैं। यह जांच डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई), गुवाहाटी जोनल यूनिट की जानकारी पर आधारित है, जिसने पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद 655.32 मीट्रिक टन सुपारी और उसे लाने-ले जाने में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को जब्त किया था।

ईडी की जांच से पता चला कि यह सिंडिकेट मिजोरम (मुख्य रूप से चम्फाई जिले) में मौजूद सप्लायर्स के नेटवर्क के जरिए काम करता था, जो भारत-म्यांमार सीमा के जरिए सुपारी की तस्करी में शामिल थे। इनमें ह्मिंगथानजामी (मालिक, बेकी कुहवा डॉर), लालरिंचहानी (मालिक, एल आर स्टोर) और लालेंकावली (मालिक, के एल स्टोर) शामिल हैं।

इसके अलावा, असम में मौजूद मददगार भी शामिल थे, जैसे अबूब अहमद मजूमदार (पूरे सिंडिकेट के मुख्य मददगारों में से एक) और प्रदीप कुमार पॉल (मालिक, शारदा ट्रेडर्स) के साथ ही पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में फैले कंसाइनी/फाइनेंसर भी शामिल थे, जैसे फलाकाटा की जय माताजी एंटरप्राइजेज, नबद्वीप की नबद्वीप अरेकानट प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड, वाराणसी की शुभ ट्रेडिंग कंपनी और चिमेरा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड। वाराणसी की एक कंपनी जो सर्कुलर ट्रेडिंग के लिए इनवॉइस देती है के साथ ही कोलकाता के शशि कुमार चौधरी (मालिक, एंटरप्राइजेज) और लॉजिस्टिक्स में मदद करने वाली कंपनी बीकानेर असम रोडलाइन्स इंडिया लिमिटेड (गुवाहाटी) भी इसमें शामिल हैं।

जांच से यह भी पता चला कि यह सिंडिकेट म्यांमार से विदेशी सुपारी की तस्करी करता है। यह तस्करी भारत-म्यांमार सीमा पर चम्फाई-जोखाव्थर रूट से होती है, जबकि चम्फाई में खुद सुपारी का उत्पादन नहीं होता है। केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों से मिले आधिकारिक उत्पादन डेटा से पता चला कि चम्फाई जिले में, जहां से ज्यादातर खेप आने की बात कही गई थी, उन वर्षों में सुपारी का घरेलू उत्पादन शून्य था। इससे पुष्टि हुई कि माल तस्करी करके लाया गया विदेशी सुपारी था, जिसे भारत-म्यांमार सीमा के रास्ते लाया गया था।

काम को असली दिखाने के लिए यह ग्रुप नकली जीएसटी इनवॉइस, फर्जी सप्लायर/खरीदार फर्म और झूठे ट्रांसपोर्ट कागजात का इस्तेमाल करता है। इसके बाद पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में खरीदारों के जरिए पैसे का लेन-देन किया जाता है। ये खरीदार सिलचर/असम के हवाला ऑपरेटरों को भुगतान करते हैं, जो फिर ज्यादातर मिजोरम रूरल बैंक के ट्रांजिट खातों के जरिए पैसे भेजते हैं। इन खातों से असली जमाकर्ता की पहचान छिपी रहती है और पैसा चम्फाई के तस्करों तक पहुंचता है। आखिर में उन खातों से बड़ी मात्रा में नकद निकालकर हवाला के जरिए म्यांमार के सप्लायरों को वापस भेज दिया जाता है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग का चक्र पूरा हो जाता है।

बैंक खातों, जीएसटी रिटर्न और इंटरनेशनल ट्रेड डेटा की जांच-पड़ताल से पता चला है कि इस सिंडिकेट ने 1,500 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध कमाई की थी। इस पैसे को तस्करों तक वापस पहुंचाने से पहले करंट अकाउंट, इंटरमीडिएट अकाउंट और फ्रंट/शेल कंपनियों के एक जटिल जाल के जरिए घुमाया गया।

तलाशी अभियान के दौरान ईडी की ओर से पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत कई चीजें जब्त की गईं। इनमें सुपारी के व्यापार के मैनुअल रिकॉर्ड (डायरी), आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद अचल संपत्तियों के मालिकाना हक के कागजात और प्रॉपर्टी के दस्तावेज, बिजनेस रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और हार्ड ड्राइव जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और 1.30 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी शामिल है।

ईडी ने तलाशी के दौरान तस्करों से जुड़े कुल 33 बैंक खातों को फ़्रीज करने का आदेश दिया। तलाशी में यह भी पता चला कि अपराधियों द्वारा अवैध कमाई को रियल एस्टेट में लगाया गया था। तस्करों और उनके सहयोगियों ने चम्फाई, सिलचर, गुवाहाटी, नबद्वीप, फलाकाटा, कोलकाता और वाराणसी जैसे शहरों में पॉश इलाकों में स्वतंत्र विला और ऊंची इमारतें खरीदीं और बनवाईं। व