पटना, 7 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार सरकार ने राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, डिजिटल और नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर विभाग ने स्पष्ट किया है कि राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (आरसीएमएस) के तहत दायर मामलों की सुनवाई के दौरान अब किसी भी पक्षकार से भौतिक दस्तावेज या साक्ष्य स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सभी साक्ष्य केवल आरसीएमएस पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे और उन्हीं के आधार पर मामलों का निष्पादन होगा।
इस संबंध में विभाग के सचिव जय सिंह ने राज्य के सभी समाहर्ताओं, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं और अंचल अधिकारियों को निर्देश जारी कर व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। विभाग ने पाया था कि कुछ स्थानों पर सुनवाई के दौरान पक्षकारों से भौतिक दस्तावेज लिए जा रहे थे, जो आरसीएमएस की निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत है। इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से ऐसी प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।
मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि बिहार सरकार राजस्व न्यायालयों को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक हितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आरसीएमएस की व्यवस्था का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को ऑनलाइन, जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है। किसी भी स्तर पर भौतिक दस्तावेज लेने की आवश्यकता नहीं है और सभी अधिकारी निर्धारित व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त दस्तावेज या साक्ष्य की आवश्यकता होगी तो संबंधित पक्षकारों को केवल आरसीएमएस पोर्टल पर ही दस्तावेज अपलोड करने के लिए कहा जाएगा। सभी राजस्व न्यायालय भी केवल पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय देंगे।
विभाग के अनुसार, नई व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, दस्तावेजों में छेड़छाड़ या विवाद की संभावना समाप्त होगी तथा सभी अभिलेख सुरक्षित डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध रहेंगे। इससे आम नागरिकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, समय और खर्च दोनों की बचत होगी तथा राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।

