Tuesday, July 7, 2026
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राम मंदिर ट्रस्ट फैसले पर संत समाज बंटा, चंपत राय को लेकर उठे सवाल और निष्पक्ष जांच की मांग

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अयोध्या, 7 जुलाई (आईएएनएस)। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलाव और कथित चढ़ावा अनियमितताओं के मामले को लेकर अयोध्या के संत समाज की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद कुछ संतों ने उनके लंबे योगदान का उल्लेख करते हुए उनका समर्थन किया, जबकि कुछ संतों ने ट्रस्ट के फैसले का स्वागत करते हुए मामले में पारदर्शी जांच और जवाबदेही की मांग की है।

बद्रीनाथ के ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु स्वामी ओंकारानंद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “मैं यह जानना चाहता हूं कि आखिर चंपत राय से इस्तीफा क्यों लिया गया। यदि मंदिर के खजाने से चोरी या अनियमितता हुई है, तो उसकी जवाबदेही संबंधित व्यवस्था संभालने वाले लोगों की भी बनती है। चंपत राय ने दशकों तक राम जन्मभूमि आंदोलन और कारसेवकों की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया है। यदि उनकी कोई गलती रही भी है, तो वह केवल किसी पर विश्वास करना था, और उनके साथ विश्वासघात हुआ है।”

स्वामी ओंकारानंद ने कहा, “मैं चंपत राय को वर्ष 1987 से जानता हूं और राम जन्मभूमि आंदोलन के शुरुआती दौर से उन्हें भगवान राम और कारसेवकों की सेवा में पूरी निष्ठा के साथ कार्य करते देखा है। यह पत्र केवल व्यक्तिगत भावनाओं का नहीं, बल्कि आंदोलन के प्रति उनके वर्षों के समर्पण का भी दस्तावेज है।”

उन्होंने कहा, “चंपत राय की जगह जिन लोगों को नई जिम्मेदारी दी गई है, उनके अनुभव और आंदोलन से जुड़ाव की तुलना भी की जानी चाहिए। चंपत राय उच्च शिक्षित और लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राम मंदिर आंदोलन के लिए समर्पित किया।”

वहीं, महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने अलग राय रखते हुए कहा, “कई रामभक्तों के मन में शंकाएं थीं और वे चाहते थे कि चंपत राय और अनिल मिश्रा अपने पद छोड़ें। अब दोनों के इस्तीफे के बाद अनेक श्रद्धालु संतुष्ट हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति पर एक बार आरोप लग जाने के बाद उसकी छवि पर प्रभाव पड़ता है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।”

आर्य संत वरुण दास महाराज ने कहा, “चंपत राय के पत्र से उनके मन का दर्द सामने आया है। ट्रस्ट की प्रेस वार्ता सुनने के बाद ऐसा लगा कि चंपत राय को ‘बलि का बकरा’ बनाया जा रहा है। हालांकि इस मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। यदि शुरुआत से ही पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक की जाती तो लोगों के मन में कम सवाल उठते।”

तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने ट्रस्ट के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा, “ट्रस्ट ने जो भी फैसला लिया है, वह स्वीकार्य है। भविष्य में भी ट्रस्ट जो निर्णय करेगा, संत समाज उसके साथ खड़ा रहेगा और मंदिर व्यवस्था को लेकर सामूहिक सहयोग जारी रहेगा।”

रामलला विराजमान मामले के पूर्व वादी और हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत धर्म दास ने भी पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “इस मामले को पक्ष और विपक्ष के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने आनी चाहिए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या चोरी के आरोप लगे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।”