बेंगलुरु, 8 जुलाई (आईएएनएस)। अभिनेता और राजनेता कमल हासन पर कन्नड़ भाषा, साहित्य, भूमि और संस्कृति का अपमान करने का आरोप है। इस मामले को बुधवार को बेंगलुरु की विधायक-सांसदों (एमएलए/एमपी) के मामलों की विशेष अदालत को स्थानांतरित कर दिया गया।
इस मामले में पहले कनकपुरा टाउन कोर्ट में कमल हासन के खिलाफ एक निजी शिकायत दर्ज कराई गई थी। हालांकि, तमिलनाडु से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद अब यह मामला बेंगलुरु की 42वीं जनप्रतिनिधि अदालत को भेज दिया गया है। मामले पर सुनवाई करते हुए विशेष अदालत ने अगली सुनवाई 22 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।
मई 2025 में चेन्नई में अपनी फिल्म के प्रमोशनल कार्यक्रम के दौरान कमल हासन ने कहा था कि कन्नड़ भाषा तमिल से जन्मी है। इस बयान के बाद बड़ा भाषाई विवाद खड़ा हो गया था।
कर्नाटक में इस बयान के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। कमल हासन से बिना शर्त माफी की मांग की गई थी और उनकी फिल्म के बहिष्कार की भी चेतावनी दी गई थी।
हालांकि, कमल हासन ने माफी मांगने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि उन्होंने यह टिप्पणी स्नेहवश और इतिहासकारों के विचारों के आधार पर की थी। बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाषा की उत्पत्ति जैसे विषयों पर बहस करने के लिए राजनेता योग्य नहीं हैं और इस विषय को भाषाविदों पर छोड़ देना चाहिए।
इस विवाद के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री और कई राजनीतिक नेताओं ने भी उनके बयान की आलोचना की थी। वहीं, कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी सार्वजनिक हस्तियों द्वारा भाषाई भावनाओं को आहत करने को लेकर नाराजगी जताई थी।
हाल ही में जुलाई में यह मामला फिर चर्चा में आया, जब उनके बयान को लेकर एक अदालत में निजी शिकायत दर्ज कराई गई।
इससे पहले कर्नाटक हाई कोर्ट ने कमल हासन को फटकार लगाते हुए कहा था कि एक माफी से पूरा विवाद खत्म हो सकता था। अदालत ने कहा था, ”किसी को भी लोगों की भावनाएं आहत करने का अधिकार नहीं है।”
अदालत ने उनसे यह भी पूछा था कि क्या वह इतिहासकार हैं या भाषाविद् हैं? पीठ ने यह भी कहा था कि मौजूदा परिस्थितियां स्वयं अभिनेता के बयान के कारण पैदा हुई हैं।
अदालत ने टिप्पणी की थी, ”एक सार्वजनिक व्यक्ति सार्वजनिक मंच पर इस तरह का बयान कैसे दे सकता है? आप अपने बयान को स्वीकार भी करते हैं और फिर कहते हैं कि माफी नहीं मांगेंगे।”

