Wednesday, July 8, 2026
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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फंड दुरुपयोग मामले में सीबीआई का एक्शन, एचएलडब्ल्यूबी के दो अधिकारी गिरफ्तार

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चंडीगढ़, 8 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फंड के गलत इस्तेमाल के मामले में हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड (एचएलडब्ल्यूबी) के अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में सीबीआई ने एचएलडब्ल्यूबी के अकाउंटेंट (कॉन्ट्रैक्ट पर) अमित कुमार और अकाउंट्स ऑफिसर जुगल किशोर को गिरफ्तार किया है।

ये दोनों अधिकारी एचएलडब्ल्यूबी के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (चंडीगढ़ की सेक्टर-32 ब्रांच) में मौजूद खाते से सरकारी पैसे के गबन के मामले में शामिल थे। इसी को लेकर हरियाणा सरकार के कहने पर सीबीआई ने यह केस अपने हाथ में लिया था।

मामले की जांच में पता चला कि एचएलडब्ल्यूबी के खाते से 50 करोड़ रुपए का सरकारी पैसा धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए निकाला गया और ‘शेल कंपनियों’ (फर्जी कंपनियों), जैसे कैपको फिनटेक सर्विसेज, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, में भेज दिया गया।

जांच में जुगल किशोर और अमित कुमार के खिलाफ ठोस सबूत मिले, जिसके आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया और उन्हें सीबीआई की कस्टडी में भेज दिया गया।

एचएलडब्ल्यूबी से जुड़ा यह धोखाधड़ी का मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (चंडीगढ़ की सेक्टर-32 ब्रांच) में हुए एक बड़े बैंकिंग फ्रॉड का हिस्सा है। इस बड़े फ्रॉड में हरियाणा सरकार के आठ विभागों का लगभग 504 करोड़ रुपए का सरकारी पैसा कथित तौर पर फर्जी/अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए निकाला गया और बाद में फर्जी कंपनियों के जरिए इधर-उधर किया गया।

बता दें कि राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने हरियाणा के स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो से जांच अपने हाथ में ली थी। अब तक सीबीआई ने हरियाणा मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन सरकारी कर्मचारी, दो कंपनियां और छह प्राइवेट व्यक्ति शामिल हैं।

सीबीआई इस मामले में शामिल सभी जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने और यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध है।