ब्रुसेल्स, 9 जुलाई (आईएएनएस)। यूरोपीय संसद ने एक संशोधन को मंजूरी दी है, जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के उस फैसले की आलोचना की गई है, जिसके तहत एक खास यूक्रेनी सैन्य यूनिट का नाम दूसरे विश्व युद्ध के दौर की ‘यूक्रेनी इंसर्जेंट आर्मी’ (यूपीए) के नाम पर रखा गया था। इस फैसले ने पोलैंड और यूक्रेन के बीच कूटनीतिक विवाद पैदा कर दिया है।
यूरो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संसद के ज्यादातर सदस्यों ने इस संशोधन के पक्ष में मतदान किया। इसमें जेलेंस्की के इस कदम को ‘हाल का अनावश्यक और बिना वजह किया गया तनाव बढ़ाने वाला फैसला’ बताया गया। साथ ही, इसमें रूस के सैन्य हमले के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई में पोलैंड के समर्थन का भी जिक्र किया गया।
यूरोपीय पीपुल्स पार्टी से जुड़े पोलिश सांसद आंद्रेज हालिकी और उनके जर्मन सहयोगी माइकल गेहलर ने यह संशोधन पेश किया था। इसे यूक्रेन के यूरोपीय संघ (ईयू) में शामिल होने की प्रक्रिया पर तैयार की गई एक रिपोर्ट में शामिल किया गया।
यूक्रेन में यूपीए को सोवियत शासन का विरोध करने और यूक्रेन की आजादी के लिए लड़ने वाले संगठन के रूप में देखा जाता है। वहीं, पोलैंड में इसे 1943-45 के वोलिन नरसंहार से जोड़ा जाता है, जिसमें नाजी कब्जे के दौरान हजारों पोलिश लोगों की मौत हुई थी। पोलैंड इसे नरसंहार मानता है, जबकि यूक्रेन इस बात से सहमत नहीं है।
यूरोपीय संसद के प्रस्ताव में जेलेंस्की के फैसले पर नाराजगी जताई गई और कहा गया कि इससे यूपीए से जुड़े उन हजारों पीड़ितों और उनके परिवारों की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया है, जिनका पोलैंड में गहरा सम्मान किया जाता है।
प्रस्ताव में कहा गया कि यह कदम पड़ोसी देशों के रिश्तों को प्रभावित करता है और यूरोपीय मूल्यों के अनुरूप नहीं है। इसमें यूक्रेन और पोलैंड से तनाव कम करने और आपसी सुलह की दिशा में काम करने की अपील की गई।
जेलेंस्की के इस फैसले के बाद पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नॉवरोकी ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से पोलैंड का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ वापस ले लिया। यह सम्मान जेलेंस्की को 2023 में दिया गया था।
हालांकि, इस संशोधन के बावजूद यूरोपीय संसद के प्रस्ताव में यूक्रेन के लिए समर्थन दोहराया गया और यूरोपीय संघ में शामिल होने की दिशा में यूक्रेन की प्रगति को भी मान्यता दी गई।
बता दें कि 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से यूरोपीय संघ के देशों ने यूक्रेन को सैन्य, आर्थिक और मानवीय सहायता दी है।
इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें वहां के राजनीतिक नेताओं, सैन्य आपूर्ति व्यवस्था, ऊर्जा से होने वाली कमाई और वित्तीय व्यवस्था को निशाना बनाया गया है।

