बेलगावी, 10 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय प्रांत प्रचारक बैठक शुक्रवार से कर्नाटक के बेलगावी में शुरू हो गई। 10 से 12 जुलाई तक चलने वाली इस बैठक में देशभर से संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी संगठन की गतिविधियों और भविष्य की रणनीति पर मंथन करेंगे। इस बीच बैठक को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई।
अनागोल स्थित मीरा स्कूल में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत कर रहे हैं।
बैठक में देश के 11 क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित संघ के 136 से अधिक वरिष्ठ पदाधिकारी और 32 सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। प्रमुख रूप से सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, डॉ. कृष्ण गोपाल, सी.आर. मुकुंद और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष भी मौजूद हैं।
आरएसएस के अनुसार, इस वार्षिक बैठक में बीते एक वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी और आने वाले महीनों के लिए संगठन के विस्तार एवं विभिन्न कार्यक्रमों की रणनीति तय की जाएगी।
बैठक में संघ की शाखाओं के विस्तार, सहयोगी संगठनों के बीच समन्वय मजबूत करने, संघ से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों के कामकाज की समीक्षा समेत कई संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा अयोध्या राम मंदिर चंदा मामले से जुड़े हालिया विवादों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।
बैठक के बीच कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने कथित राम मंदिर चंदा घोटाले को लेकर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, “राम मंदिर निर्माण का श्रेय आपने लिया था। इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, जिनमें चंपत राय भी शामिल हैं, उनका संबंध वीएचपी से है। उन्हें सामने आकर जवाब देना चाहिए। जब आरोप सामने आए तो आप चुप क्यों थे? वीएचपी की स्थापना आरएसएस के तत्कालीन प्रमुख एम.एस. गोलवलकर के मार्गदर्शन में हुई थी। अगर मंदिर निर्माण का श्रेय लेते हैं तो इन आरोपों का जवाब भी देना चाहिए।”
खरगे ने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर बयान देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि बैठक में जो भी प्रस्ताव पारित होंगे, वह आरएसएस का आंतरिक मामला है, लेकिन चंदे के इस्तेमाल और जवाबदेही पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।
प्रियंक खरगे के बयान पर केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने तीखा पलटवार किया।
उन्होंने कहा, “प्रियंक खरगे कर्नाटक के गृह मंत्री कम और आरएसएस मंत्री ज्यादा बन गए हैं। शायद ही कोई दिन जाता हो जब वह आरएसएस पर बयान न देते हों। लेकिन राज्य में हो रहे दुष्कर्म, ड्रग नेटवर्क, हत्याएं और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर वह कुछ नहीं बोलते।”
करंदलाजे ने आरोप लगाया कि प्रियंक खरगे अपने मंत्री पद और कांग्रेस में अपने पिता की राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार आरएसएस को निशाना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, “उन्हें कर्नाटक के हितों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का जायजा लेने के लिए कितने जिलों का दौरा किया? राज्य के कई जिलों में दिनदहाड़े हिंसक अपराध हो रहे हैं, लेकिन इन मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय वह लगातार आरएसएस पर हमला कर रहे हैं।”
आरएसएस की यह तीन दिवसीय बैठक 12 जुलाई को समाप्त होगी। बैठक के समापन पर संगठन अगले एक वर्ष के लिए अपनी गतिविधियों और कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेगा।

