Sunday, July 12, 2026
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प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्रा ने भारत की सामरिक, आर्थिक और वैश्विक शक्ति को मजबूती दी: संबित पात्रा

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नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं लोकसभा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने रविवार को दिल्ली स्थित भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सेशेल्स, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा ने भारत की सामरिक, आर्थिक और वैश्विक स्थिति को नई मजबूती प्रदान की है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने यात्रा की 10 प्रमुख उपलब्धियों को ’10 कदम, 10 का दम’ बताया और कहा कि इन यात्राओं से भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ी, अनेक महत्वपूर्ण समझौते हुए, भारत की रणनीतिक एवं आर्थिक शक्ति सुदृढ़ हुई और विश्व मंच पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व तथा भारत की बढ़ती भूमिका को व्यापक सम्मान मिला है।

डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तीन देशों की यात्रा रही। प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड गए। उससे पहले वह सेशेल्स भी गए थे। इस बीच जापान की राष्ट्राध्यक्ष भी भारत आई थीं। इस यात्रा के 10 महत्वपूर्ण परिणामों को बहुत सरल भाषा में समझाया जाएगा। इसी कारण इसका नाम ’10 कदम, 10 का दम’ रखा गया है। पहला, इंडियन ओशियन-इंडो पैसिफिक स्ट्रैटेजिक एलायंस। दूसरा, डिफेंस और मैरीटाइम को-ऑपरेशन। तीसरा, क्रिटिकल मिनरल को-ऑपरेशन। चौथा, एनर्जी सिक्योरिटी। पांचवां, इकोनॉमिक एंड इन्वेस्टमेंट आउटकम्स, अर्थात आर्थिक परिणाम। छठा, स्पेशल जेस्चर्स एंड कर्टसीज एक्सटेंडेड टू द प्राइम मिनिस्टर, जो केवल प्रधानमंत्री के लिए नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए हैं। सातवां, सिविलाइजेशनल एंड कल्चरल पार्टनरशिप। आठवां, डिजिटल पब्लिक इंफ्रा एंड एजुकेशनल पार्टनरशिप। नौवां, स्पोर्ट्स और दसवां, पीपल टू पीपल रिलेशनशिप रहा।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि पहला विषय सामरिक, अर्थात स्ट्रैटेजिक है। एक से तीन तारीख तक प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स गए थे। इसके बाद छह तारीख से उनकी यात्रा शुरू हुई और वह इंडोनेशिया गए। भारत में कुछ राजनीतिक लोग केवल एक आयामी, अर्थात वन-डाइमेंशनल सोच रखते हैं, जबकि तीनों दिशाओं से, थ्रीडी सोच के साथ यह समझना चाहिए कि कौन-सा देश कहां स्थित है और उसकी यात्रा से क्या लाभ प्राप्त होता है। मानचित्र में भारत के साथ सेशेल्स और इंडोनेशिया की स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है। सेशेल्स इंडियन ओशियन के अर्थात पश्चिमी छोर पर स्थित है, जबकि इंडोनेशिया इंडियन ओशियन के पूर्वी छोर पर स्थित है। इस प्रकार इंडियन ओशियन के दोनों छोरों के बीच एक महत्वपूर्ण स्ट्रैटेजिक एलायंस स्थापित हुआ। एक ओर सेशेल्स और दूसरी ओर इंडोनेशिया, इन दोनों को भारत के हित में एक साथ जोड़ना भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने करके दिखाया। बहुत से लोगों को इंडो-पैसिफिक का महत्व समझ में नहीं आता। सबसे पहले जापान की राष्ट्राध्यक्षा भारत आई थीं। जापान प्रशांत महासागर, अर्थात पैसिफिक ओशियन, में स्थित है। इसके बाद प्रधानमंत्री इंडोनेशिया से ऑस्ट्रेलिया गए और फिर न्यूजीलैंड गए। इस प्रकार जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड एक ओर तथा सेशेल्स और इंडोनेशिया दूसरी ओर मिलकर इंडियन ओशियन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को जोड़ते हैं। इन यात्राओं तथा आपसी संवाद से इंडियन ओशियन और इंडो-पैसिफिक, दोनों क्षेत्रों में सामरिक, आर्थिक, वैचारिक, जनता के बीच आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संबंधों का एक सशक्त सेतु स्थापित हुआ। पहला विषय सामरिक और स्ट्रैटेजिक है तथा इसी के माध्यम से भारत आज इंडियन ओशियन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक ‘स्टेबलाइजिंग फोर्स’, अर्थात स्थिरता प्रदान करने वाली शक्ति, के रूप में उभरा है। डिप्लोमेसी में प्रत्येक शब्द महत्वपूर्ण होता है और इस शब्द को विशेष रूप से याद रखना चाहिए।

डॉ. पात्रा ने कहा कि विश्व में अनेक देशों में सरकारें और नीतियां बदलीं तथा कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन भारत ने निरंतर स्थिरता का संदेश दिया। वर्ष 2014 से अब तक राजनीतिक नेतृत्व, सुशासन, नीति और आर्थिक स्थिरता के बल पर भारत आज इंडो-पैसिफिक और हिंद महासागर क्षेत्र में एक ‘स्टेबलाइजिंग फोर्स’ के रूप में उभरा है। इसी दृष्टिकोण के तहत भारत ने इंडो-पैसिफिक और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के लिए एक नया सहयोगी फ्रेमवर्क तैयार किया, जिसे सभी साझेदार देशों ने स्वीकार करते हुए दीर्घकालिक सहयोग पर सहमति व्यक्त की। डॉ. पात्रा ने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, दूरदृष्टि और भारत की नीतियों पर बढ़ते वैश्विक विश्वास का प्रमाण बताया। इसी क्रम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने ‘इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ सबांग पोर्ट’ में विशेष रुचि दिखाई। स्ट्रेट ऑफ मलक्का के निकट स्थित यह बंदरगाह व्यापार और रक्षा, दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके विकास से भारत की रणनीतिक उपस्थिति मजबूत होने के साथ निवेश, रोजगार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा अंडमान-निकोबार और सुमात्रा क्षेत्र के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। इसी सामरिक दृष्टिकोण के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ पर हस्ताक्षर हुए, जिसके माध्यम से दोनों देशों ने रणनीतिक सहयोग को और सुदृढ़ करने का निर्णय लिया।

भाजपा सांसद ने कहा कि पहले विषय, अर्थात स्ट्रैटेजी, के अंतर्गत भारत और न्यूजीलैंड ने ‘रोडमैप टू 2030’ एक साथ तैयार करने का निर्णय लिया है। इस रोडमैप में डिफेंस, ट्रेड, टेक्नोलॉजी और एजुकेशन जैसे विषय शामिल रहेंगे। भारत और न्यूजीलैंड के बीच सबसे बड़ी स्ट्रैटेजिक उपलब्धि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट रही, जो अनेक वर्षों से लंबित था। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके न्यूजीलैंड के समकक्ष के बीच यह तय हुआ है कि इसे यथाशीघ्र लागू और इम्प्लिमेंट किया जाएगा। यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अपने आप में एक बहुत बड़ी स्ट्रैटेजिक, अर्थात सामरिक, विजय के रूप में देखा जा सकता है। इस प्रकार इस दौरे से इंडियन ओशियन-इंडो पैसिफिक स्ट्रैटेजिक एलायंस का पहला उद्देश्य प्राप्त हुआ। दूसरा विषय डिफेंस एंड मैरीटाइम को-ऑपरेशन है। डिफेंस और मैरीटाइम शक्ति जिस देश के पास होती है, वह बहुत आगे बढ़ता है। एक समय ऐसा भी था जब भारत अपने रक्षा क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी देशों से आयात पर निर्भर रहता था। आज स्थिति बदल गई है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इंडोनेशिया गए, तो वहां यह निर्णय लिया गया कि इंडोनेशिया अपनी इन्वेंटरी में भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल्स को शामिल करेगा। यह भारत और प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। इसके साथ ही मेक इन इंडिया के अंतर्गत विकसित स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म भी वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं। मेक इन इंडिया का राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी मजाक उड़ाते थे, लेकिन आज भारत में स्वदेशी रूप से विकसित एस्ट्रा बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल को लेकर इंडोनेशिया में डील हुई और उस पर चर्चा हुई। यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है कि उसकी स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमता अब विदेशों तक पहुंच रही है। पहली बार भारत डिफेंस इक्विपमेंट्स का एक्सपोर्टर बन रहा है और यह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।