Wednesday, July 15, 2026
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पुरी: जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले गुंडिचा मंदिर में ‘गुंडिचा मार्जन’ की रस्म, श्रद्धालुओं ने की साफ-सफाई

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पुरी, 15 जुलाई (आईएएनएस)। ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले बुधवार को गुंडिचा मंदिर में ‘गुंडिचा मार्जन’ रस्म निभाई गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आए और उन्होंने पूरे मंदिर परिसर की साफ-सफाई की।

‘गुंडिचा मार्जन’ रस्म में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के आगमन से पहले उनके अस्थायी निवास ‘गुंडिचा मंदिर’ की साफ-सफाई की जाती है। भगवान की ‘मौसी का घर’ कहे जाने वाले इस गुंडिचा मंदिर का स्वरूप प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव के दौरान दिव्य ऊर्जा के केंद्र में बदल जाता है, जब स्वयं भगवान जगन्नाथ 7 दिनों के लिए यहां विराजमान होते हैं।

हरियाणा के रोहतक से पुरी पहुंची एक महिला श्रद्धालु ने कहा, “भगवान जगन्नाथ ने मुझे ‘गुंडिचा मार्जन’ रस्म में शामिल होने का अवसर दिया है। मैं अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली मानती हूं।”

पहली बार पुरी की रथ यात्रा का हिस्सा बनने पहुंची एक महिला श्रद्धालु ने कहा, “बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा लग रही है जैसे भगवान के साक्षात दर्शन हो रहे हैं। यहां का नजारा बेहद अद्भुत है। यहां की व्यवस्था भी अच्छी है।”

एक और महिला श्रद्धालु ने कहा, “बहुत अच्छा लगा रहा है। इतनी भीड़ होने के बाद भी सब आराम से निकल पा रहे हैं, नहीं तो भीड़ में धक्का-मुक्की होती है।”

कोलकाता से आए एक श्रद्धालु ने कहा, “मैं हर साल जगन्नाथ रथ यात्रा के समय पुरी आता हूं। गुरुवार को रथ यात्रा निकलनी है। यहां प्रभु के दर्शन के लिए लाखों लोग आए हुए हैं।”

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। यहां भगवान जगन्नाथ के भक्तों की भारी भीड़ है। हम बहुत दूर से आए हैं।”

एक और श्रद्धालु ने कहा, “हम भगवान जगन्नाथ के दर्शन करेंगे और उनका आशीर्वाद लेंगे। इसका बहुत महत्व है, क्योंकि यह चार पवित्र धाम यात्राओं में से एक है।”

ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा गुरुवार को शुरू होगी। इसके पहले तीनों भव्य रथ नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन को रंग-बिरंगे वस्त्रों, फूलों और अलंकृतियों से सजाया जा रहा है। रथों की अंतिम पूजा-अर्चना और पारंपरिक रस्में पूरी की जा रही हैं। भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी गुंडिचा मंदिर की ओर रथ यात्रा पर निकलेंगे। हजारों श्रद्धालु रस्सियां खींचकर रथों को खींचेंगे।