भोपाल : 9 जुलाई/ रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू), स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी (एसजीएसयू) और विश्वरंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुति ‘स्वाधीनता के गान’ ने गुरुवार शाम राजधानी भोपाल को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। रवीन्द्र भवन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों, कविता, संगीत और नृत्य के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा जीवंत हो उठी। कार्यक्रम के समापन पर ‘वंदेमातरम्’ की सामूहिक प्रस्तुति के दौरान पूरा सभागार तिरंगों और भारत माता के जयघोष से गूंज उठा।
हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत प्रस्तुत इस सांस्कृतिक संध्या में बड़ी संख्या में कला प्रेमियों ने भाग लिया। बादलों और हल्की बारिश के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में युवा कलाकारों और बाल प्रतिभाओं ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कविता, संगीत और नृत्य के माध्यम से जीवंत हुई आजादी की कहानी
कार्यक्रम की मुख्य परिकल्पना वरिष्ठ साहित्यकार एवं आरएनटीयू के कुलाधिपति संतोष चौबे की थी। प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना क्षमा मालवीय ने नृत्य संयोजन किया, जबकि संतोष कौशिक और राजू राव ने संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली। कार्यक्रम में कला समीक्षक विनय उपाध्याय के प्रभावशाली वाचन ने स्वतंत्रता आंदोलन की भावनाओं को जीवंत कर दिया।
पुरू कथक नृत्य अकादमी की 75 से अधिक नृत्यांगनाओं ने देशभक्ति गीतों पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। रंगकर्मी अनूप जोशी के प्रकाश संयोजन, उमेश तरकसवार के संगीत संयोजन तथा आईसेक्ट स्टूडियो की तकनीकी टीम ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया।
भारतेन्दु से दिनकर तक की कविताओं ने जगाया देशप्रेम
कार्यक्रम में आधुनिक हिन्दी साहित्य के महान कवियों की देशभक्ति रचनाओं को संगीत और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुभद्रा कुमारी चौहान, सोहनलाल द्विवेदी, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, माखनलाल चतुर्वेदी और बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय सहित अनेक रचनाकारों की कालजयी कविताओं ने दर्शकों में राष्ट्रप्रेम का संचार किया।
विशेष रूप से “वीरों का कैसा हो वसंत”, “चाह नहीं मैं सुरबाला” और “वंदेमातरम्” जैसी प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को भावविभोर कर दिया।
नई पीढ़ी तक पहुंचे स्वतंत्रता संग्राम की चेतना
कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि आज की पीढ़ी को उन कविताओं और साहित्यकारों से परिचित कराना आवश्यक है, जिनकी लेखनी ने गुलामी के दौर में देशवासियों के भीतर आजादी की चेतना जगाई। उन्होंने कहा कि ‘स्वाधीनता के गान’ केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि शब्द की शक्ति और राष्ट्रनिर्माण में साहित्य की भूमिका को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अभियान है।
‘स्वाधीनता के गान’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण
इस अवसर पर आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘स्वाधीनता के गान’ का भी लोकार्पण किया गया। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रकाशित इस पुस्तक में हिन्दी के 34 कवियों की 50 से अधिक देशभक्ति कविताओं का संकलन किया गया है। पुस्तक का संपादन श्रीराम परिहार और रामवल्लभ आचार्य ने किया है। इसके परामर्शदाता संतोष चौबे तथा समन्वयक विनय उपाध्याय रहे।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि स्वतंत्रता केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति और कला के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रहने वाली राष्ट्रीय चेतना है। ‘स्वाधीनता के गान’ ने इसी चेतना को संगीत, नृत्य और कविता के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।



