Wednesday, July 22, 2026
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झारखंड में मंत्रियों और ब्यूरोक्रेसी के बीच कथित टकराव, मुख्यमंत्री मौन क्यों: प्रदीप सिन्हा

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रांची, 21 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड में मंत्रियों और ब्यूरोक्रेसी के बीच कथित टकराव को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर जुबानी हमला किया। भाजपा के झारखंड प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने आरोप लगाया कि राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों की लगातार अनदेखी की जा रही है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चुप्पी यह संकेत देती है कि शीर्ष स्तर के अधिकारियों को सरकार का संरक्षण प्राप्त है। यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं निकाला गया तो शासन व्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

प्रदीप सिन्हा ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा कि पिछले लगभग एक महीने से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा उठाए गए मुद्दों को लेकर पत्राचार हो रहा है और उससे जुड़ी कई बातें सार्वजनिक भी हो चुकी हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यपालिका और विधायिका दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां और सीमाएं तय हैं। दोनों को एक दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम करना चाहिए। लेकिन यदि वरिष्ठ मंत्री की लगातार अवहेलना हो रही है और मुख्यमंत्री इस पूरे मामले पर मौन हैं, तो इससे गलत संदेश जाता है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर समाधान निकालना चाहिए था, लेकिन उनकी चुप्पी से ऐसा प्रतीत होता है कि शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों को खुली छूट दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से अधिकारियों को यह संदेश दिया जा रहा है कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।

उन्होंने हाल की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राज्य के डीजीपी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन नहीं उठाया गया। इतना ही नहीं, व्हाट्सएप मैसेज का भी जवाब नहीं दिया गया और बाद में कॉल बैक तक नहीं किया गया। प्रदीप सिन्हा ने इसे राजनीतिक दलों के प्रति असम्मानजनक व्यवहार बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर नौकरशाही को उसकी संवैधानिक और प्रशासनिक सीमाओं के भीतर काम करने के निर्देश देने चाहिए।

जब उनसे पूछा गया कि क्या यह सब मुख्यमंत्री के इशारे पर हो रहा है, तो उन्होंने दावा किया कि बिल्कुल इशारे पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य का एक वरिष्ठ मंत्री किसी अधिकारी से मिलने जाए और उसे 15 मिनट तक इंतजार करना पड़े, तो यह स्पष्ट संकेत है कि हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। इसी कारण कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के राजू को भी इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। हालांकि, भाजपा का आरोप है कि उनके बयान में समस्या के समाधान की कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिखी और उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की बात भी नहीं कही। उन्होंने केवल कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के साथ खड़े रहने की अपील की।

प्रदीप सिन्हा ने राज्य सरकार पर मीडिया की स्वतंत्रता को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक जैसी स्थिति चिंता का विषय है। यदि पत्रकारों को सूचना के स्रोतों तक पहुंचने से रोका जाएगा तो इससे पारदर्शिता प्रभावित होगी और सरकार की मंशा पर सवाल उठेंगे। जो लोग स्वयं को संविधान का सबसे बड़ा प्रहरी बताते हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्र प्रेस की बात करते हैं, वही अब पत्रकारों के कामकाज पर पहरा लगाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार को इस तरह के कदमों से बचना चाहिए और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए।