मुंबई, 24 जुलाई (आईएएनएस)। नीट पेपर लीक विवाद को लेकर महाराष्ट्र में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए।
हर्षवर्धन सपकाल ने भी छात्र आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस कमेटी ने छात्रों की सहायता के लिए हेल्पलाइन शुरू की है, जिसमें पार्टी की टीम के साथ वकील और डॉक्टर भी जुड़े हैं। जरूरत पड़ने पर कांग्रेस कार्यकर्ता छात्रों की मदद के लिए मौके पर पहुंचेंगे।”
उन्होंने ठाकरे बंधुओं द्वारा किए जा रहे आंदोलनों पर कहा कि कई संगठन अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सभी का मुख्य मुद्दा छात्रों के हितों की रक्षा करना है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा, “नीट विवाद में छात्रों के साथ जो हुआ, उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यदि परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को जवाब देना होगा। शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।”
वहीं, शिवसेना यूबीटी के एक नेता ने कहा, “छात्र अपने भविष्य को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और विपक्षी दल उनकी आवाज को समर्थन दे रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है, लेकिन महाराष्ट्र में कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों को पुलिस हिरासत में ले रही है। शिवसेना (यूबीटी), उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और राज ठाकरे छात्रों के मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “यदि छात्रों को हिरासत में लिया जाता है तो पार्टी कार्यकर्ता उनकी मदद के लिए आगे आते हैं। छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उनके आंदोलन का समर्थन किया जा रहा है। परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि युवाओं के साथ अन्याय न हो।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रों के हितों और पेपर लीक मामले में कार्रवाई को लेकर किए गए संवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को सीधे छात्रों से बात करनी चाहिए। युवाओं ने ही सरकार को समर्थन दिया है, इसलिए उनकी समस्याओं और मांगों को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है।
नीट विवाद को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। जहां विपक्षी दल छात्रों के समर्थन में सरकार पर दबाव बना रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दे रही है।

