नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने छात्र आंदोलन, सोनम वांगचुक के विरोध-प्रदर्शन, नीट पेपर लीक, जेएनयू की एडवाइजरी और संसद में पेश किए गए ‘वंदे मातरम’ से जुड़े विधेयक सहित कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि लंबे समय से जारी विरोध-प्रदर्शन समाप्त हो सके।
आईएएनएस से बातचीत में मौलाना रशीदी ने कहा, “यदि सरकार का दावा है कि आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका हो सकती है, तो यह सुरक्षा एजेंसियों और सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यदि पाकिस्तान, बांग्लादेश या कोई अन्य बाहरी शक्ति भारत में अशांति फैलाने में सक्षम है, तो यह देश की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। ऐसे आरोप लगाने से पहले तथ्यों और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।”
छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए मौलाना रशीदी ने कहा, “इस पूरे विवाद का मुख्य मुद्दा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। यदि सरकार इस विषय पर समय रहते कोई निर्णय लेती या छात्रों से व्यापक संवाद करती, तो आंदोलन इतना लंबा नहीं चलता। मेरी सरकार से अपील है कि बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकाला जाए ताकि छात्रों की चिंताओं का अंत हो सके।”
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) द्वारा छात्रों को आंदोलन से दूर रहने की जारी की गई एडवाइजरी पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। रशीदी ने कहा, “आंदोलन में केवल जेएनयू ही नहीं, बल्कि विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र शामिल हैं। छात्र किसी भी संस्थान के हों, उनकी मांगें समान हैं और वे अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों को आंदोलन से दूर रहने की सलाह देने के बजाय सरकार और छात्रों के बीच संवाद का माहौल बनाने पर जोर देना चाहिए।”
संसद में ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण देने से जुड़े विधेयक पर मौलाना रशीदी ने कहा, “देश में इस समय कई ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर प्राथमिकता के साथ चर्चा होनी चाहिए। पिछले कई दिनों से छात्र सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे समय में सरकार को पहले शिक्षा और युवाओं से जुड़े सवालों का समाधान करना चाहिए।”
उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगीत बताते हुए कहा, “इसकी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है। हालांकि राष्ट्रगान पहले से मौजूद है, इसलिए इस विषय को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करने से बचना चाहिए। सरकार को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सभी समुदायों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।”

