Saturday, July 25, 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष का हमला तेज, कांग्रेस-सपा समेत कई दलों ने बताया छात्रों की जीत

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नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे देशभर में छात्रों और युवाओं के आंदोलन की जीत करार दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एआईएमआईएम और आजाद समाज पार्टी-भीम आर्मी के नेताओं ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और अब सरकार को परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पेपर लीक पर सख्त कानून, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की जवाबदेही और छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे कदम उठाने होंगे।

रांची में कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के भविष्य की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग और देश के भविष्य के लिए चल रहे आंदोलन के आगे सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने इसे अधूरा कदम बताते हुए कहा कि छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस ली जानी चाहिए, एनटीए को भंग किया जाना चाहिए और पूरे मामले पर संसद में चर्चा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाब देना चाहिए। सरकार का अहंकार टूट चुका है और अब छात्रों के हित में फैसले होने की उम्मीद है।

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सीकर में कहा कि यह इस्तीफा उन युवाओं की जीत है जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया। उन्होंने आंदोलन में शामिल युवाओं को सलाम करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा संघर्ष का अंत नहीं बल्कि शुरुआत है। देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है, लगातार पेपर लीक हो रहे हैं और गरीब छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों और हर छात्र को समान अवसर मिल सके। उन्होंने संसद में इस पूरे मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की भी मांग की।

समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने इस्तीफे का स्वागत करते हुए इसे छात्रों और लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के लिए माफी मांगनी चाहिए। प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया और उन पर गंभीर आरोप लगाए गए। संसद के आगामी सत्र में उनकी पार्टी छात्रों से माफी और घायल छात्रों को मुआवजा देने की मांग उठाएगी।

मऊ में आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के नेताओं ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया। भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव डॉ. टीके सागर ने कहा कि देशभर में राष्ट्रपति के नाम दिए गए ज्ञापनों और लोकतांत्रिक आंदोलन का असर दिखाई दिया है। उन्होंने मांग की कि परीक्षा विवाद में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाए। वहीं, भीम आर्मी के जिला संयोजक देवेंद्र कुमार डम्पी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि इस्तीफा नहीं होता तो आंदोलन और तेज किया जाता। उन्होंने परीक्षा विवाद में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की। साथ ही, पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजने की मांग भी की।

रामपुर में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने कहा कि सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा और यह छात्रों के आंदोलन की जीत है। वहीं, सांसद रुचि वीरा ने संघर्ष कर रहे छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह इस्तीफा पहले होना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण कई छात्र घायल हुए और कुछ की जान भी गई। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी उठाई।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लोकतांत्रिक जवाबदेही का संकेत है। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री के पास इस्तीफा पहुंच चुका है तो उसे तत्काल स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही, परीक्षा में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। लोकतंत्र में जवाबदेही तय होना जरूरी है।

मुंबई में एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा कि यह देशभर के छात्रों और युवाओं की जीत है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर छात्रों में आक्रोश था। छात्रों ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाईं, लेकिन उनकी बात समय पर नहीं सुनी गई। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही तय करने और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। साथ ही, आंदोलन में शामिल छात्रों को उनके धैर्य और शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए बधाई दी।