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गुजरात सरकार का बड़ा एक्शन: नाम में नेशनल, ब्यूरो और कमीशन शब्द लगाने वाली प्राइवेट संस्थाओं पर कसेगा शिकंजा, जांच तेज

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गांधीनगर, 16 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उन प्राइवेट संस्थाओं और एनजीओ के खिलाफ कार्रवाई करें जो सरकारी नाम, प्रतीक और पदनामों का इस्तेमाल इस तरह से करते हैं जिससे सरकारी संबंध का आभास हो। यह कार्रवाई 1950 में बने कानून के तहत राज्य-व्यापी प्रवर्तन अभियान के हिस्से के तौर पर की जा रही है।

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग के निर्देशों के बाद, सामान्य प्रशासन विभाग ने सरकारी विभागों, कार्यालयों और पंजीकरण अधिकारियों को ‘प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1950’ का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

यह अधिनियम व्यापार, व्यवसाय, पेशेवर या इसी तरह के उद्देश्यों के लिए बिना पूर्व अनुमति के कुछ खास नामों और प्रतीकों के इस्तेमाल पर रोक लगाता है।

राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार, निजी संगठनों, ट्रस्टों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपने नामों में “ब्यूरो”, “आयोग”, “मंत्रालय”, “केंद्र”, “ऑल इंडिया”, “नेशनल” और “भारतीय” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने के लिए केंद्र सरकार से पहले लिखित मंजूरी लेनी होगी, अगर इनके इस्तेमाल से सरकारी संरक्षण या जुड़ाव का संकेत मिलता हो।

ऐसे संगठनों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वे निजी उद्यम हैं और सरकार या उसके उद्देश्यों से उनका कोई संबंध नहीं है।

यह कदम केंद्र सरकार की उन चिंताओं के बाद उठाया गया है जिनमें कहा गया था कि कुछ निजी संस्थाएं सरकारी विभागों जैसे नामों का इस्तेमाल करती हैं और लेटरहेड, विज़िटिंग कार्ड, ऑफिस बोर्ड और वेबसाइटों पर सरकार से जुड़े प्रतीक या मुहर लगाती हैं।

सरकार का कहना है कि ऐसी गतिविधियों से लोगों को यह लग सकता है कि वे किसी आधिकारिक संस्था के साथ काम कर रहे हैं। यह अधिनियम खास तौर पर उन नामों और प्रतीकों को कवर करता है जो केंद्र या राज्य सरकार के संरक्षण का संकेत देते हैं।

यह सक्षम अधिकारियों को ऐसी कंपनियों, फर्मों, संस्थाओं या ट्रेडमार्क को पंजीकृत करने से भी रोकता है जिनके प्रस्तावित नाम या प्रतीक अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।

अगर इस बात पर कोई विवाद होता है कि कोई नाम या प्रतीक अधिनियम के दायरे में आता है या नहीं, तो मामले को केंद्र सरकार के पास भेजा जा सकता है, जिसका निर्णय अंतिम होगा।

इसके अनुसार, गुजरात ने सोसायटियों, फर्मों और सहकारी समितियों से जुड़े रजिस्ट्रार सहित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पंजीकरण के चरण में प्रस्तावित नामों की जांच करें और कानून का उल्लंघन करने वाले आवेदनों को खारिज कर दें।

संदेह या विवाद वाले मामलों को केंद्र सरकार के पास भेजा जाना है।

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग ने पहले भी इस मुद्दे पर राज्यों को निर्देश जारी किए हैं, जिसमें कहा गया है कि अधिनियम का उल्लंघन करके ऐसे नामों का इस्तेमाल करने वाले संगठनों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इन नए निर्देशों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि निजी संगठन अपने नामों, प्रतीकों या ब्रांडिंग के ज़रिए सरकारी समर्थन या आधिकारिक दर्जे का आभास न पैदा करें।