Monday, July 27, 2026
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    ड्रीमफ्लाई इनोवेशंस देश में स्थापित करेगी 100 मेगावाट का एविएशन बैटरी प्लांट, ‘मेक-इन-इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा

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    नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। एडवांस एविएशन बैटरी टेक्नोलॉजी पर केंद्रित भारत की डीप-टेक कंपनी ड्रीमफ्लाई इनोवेशंस ने सोमवार को उत्तर बेंगलुरु में 40,000 स्क्वायर फीट में एविएशन बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का ऐलान किया है। इसके जरिए कंपनी की कोशिश ‘मेक-इन-इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना है।

    कंपनी ने बताया कि आगामी विनिर्माण सुविधा की शुरुआती वार्षिक उत्पादन क्षमता 100 मेगावाट-घंटा होगी, जिसे बढ़ाकर 200 मेगावाट-घंटा तक किया जा सकेगा। इससे यह ड्रोन क्षेत्र के लिए समर्पित भारत की सबसे बड़ी एविएशन बैटरी निर्माण इकाइयों में से एक बन जाएगी।

    यह प्लांट रक्षा, निगरानी, बुनियादी ढांचे के निरीक्षण, कृषि छिड़काव, लॉजिस्टिक्स और एयर टैक्सी जैसे उभरते एयर मोबिलिटी प्लेटफॉर्म सहित ड्रोन के विभिन्न उपयोगों के लिए एडवांस बैटरियों का निर्माण करेगा।

    कंपनी के अनुसार, यह निवेश मानव रहित हवाई प्रणालियों के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक एविएशन बैटरियों के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करेगा और भारत की आयातित एविएशन बैटरियों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।

    ड्रीमफ्लाई ने बताया कि उसके उत्पादों में वर्तमान में 77 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग होता है, जो किसान ड्रोन नीति के उद्देश्यों के अनुरूप है और घरेलू ड्रोन निर्माताओं को स्थानीय स्तर पर विकसित पावर सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने में सहयोग करता है।

    ड्रीमफ्लाई इनोवेशंस की सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) काजल शाह ने कहा कि एविएशन बैटरियां ड्रोन के प्रदर्शन, सुरक्षा, उड़ान अवधि (एंड्योरेंस) और विश्वसनीयता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे भारत की ड्रोन अर्थव्यवस्था का विस्तार हो रहा है, एडवांस बैटरी निर्माण में घरेलू क्षमताओं का विकास बेहद आवश्यक है। हमारी नई विनिर्माण सुविधा भारत में अत्याधुनिक एविएशन बैटरियों का निर्माण करेगी, स्थानीय ड्रोन विनिर्माण को मजबूत बनाएगी और विकसित भारत, मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने में योगदान देगी।”

    कंपनी ने कहा कि विनिर्माण क्षमता का यह विस्तार स्वदेशी डीप-टेक क्षमताओं के विकास और ड्रोन तथा अगली पीढ़ी की विमानन प्रौद्योगिकियों के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की महत्वाकांक्षा को समर्थन देने की उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।