चेन्नई, 30 जुलाई (आईएएनएस)। कावेरी जल विवाद पर विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार से तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक द्वारा कावेरी जल में राज्य का वाजिब हिस्सा छोड़ने से लगातार इनकार करने के कारण अब एकजुट राजनीतिक प्रतिक्रिया जरूरी हो गई है।
एक कड़े बयान में, लोकसभा सांसद ने कर्नाटक सरकार पर कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के निर्देशों की अनदेखी करने और अंतर-राज्यीय नदी मुद्दे पर ‘तमिल-विरोधी रुख’ अपनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने चेतावनी दी कि पानी न मिलने का सिलसिला जारी रहने से कावेरी डेल्टा में खेती के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है और इससे किसानों की आजीविका पर बुरा असर पड़ सकता है।
पानी की कमी के स्तर को उजागर करते हुए थिरुमावलवन ने सीडब्ल्यूआरसी के अध्यक्ष विनीत गुप्ता द्वारा पेश किए गए आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत तमिलनाडु के लिए तय 36.4 टीएमसी फीट पानी के हिस्से के मुकाबले, 1 जून से 27 जुलाई के बीच बिलिगुंड्लु में राज्य को केवल 3.6 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी फीट) पानी ही मिला है। उन्होंने कहा कि इस दौरान राज्य को अपने हिस्से का सिर्फ 10 प्रतिशत पानी ही मिला है।
वीसीके प्रमुख ने कहा कि पानी की कुल कमी अब लगभग 33 टीएमसी फीट तक बढ़ गई है, जिससे राज्य की सिंचाई की जरूरतों पर भारी दबाव पड़ रहा है। हालांकि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने कर्नाटक को 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, लेकिन उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्य में किसान संगठन पानी छोड़े जाने के इस सीमित फैसले का भी विरोध कर रहे हैं।
थिरुमावलवन के अनुसार, पानी की अपर्याप्त उपलब्धता के कारण डेल्टा क्षेत्र के कई हिस्सों में पहले ही कुरुवई खेती का सीजन बर्बाद हो चुका है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अब सांबा फसल पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं, जिससे हजारों किसानों की आजीविका और राज्य के खाद्य उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह कहते हुए कि तमिलनाडु अब अपनी कानूनी जिम्मेदारियों को स्वेच्छा से पूरा करने के लिए कर्नाटक पर निर्भर नहीं रह सकता, वीसीके नेता ने जोर दिया कि इस मुद्दे पर सभी पार्टियों को एकजुट होकर राजनीतिक प्रतिक्रिया देने की जरूरत है।
उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह आगे की कार्रवाई पर विचार करने और डेल्टा जिलों के किसानों के हितों की रक्षा करते हुए कावेरी के पानी पर तमिलनाडु के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए एक साझा रणनीति बनाने के मकसद से तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाए।

