Friday, July 31, 2026
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चीन, तिब्बत और नेपाल में महसूस किए गए भूकंप के तेज झटके, कुछ ही घंटों में कई बार हिली धरती

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नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, शुक्रवार सुबह कुछ ही घंटों में चीन, तिब्बत और नेपाल के कई हिस्सों में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए। इनमें सबसे तेज भूकंप चीन में आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 मापी गई।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में एनसीएस ने कहा, “भूकंप की तीव्रता: 4.5, समय: 31/07/2026 01:44:06 भारतीय समय, अक्षांश: 35.259 उत्तर, देशांतर: 99.716 पूर्व, गहराई: 10 किलोमीटर, स्थान: चीन।”

इससे पहले एजेंसी ने तिब्बत में 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया था। पोस्ट में लिखा था, “भूकंप की तीव्रता: 4.2, समय: 31/07/2026 00:50:07 भारतीय समय, अक्षांश: 29.068 उत्तर, देशांतर: 86.402 पूर्व, गहराई: 90 किलोमीटर, स्थान: तिब्बत।”

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने उपयोगकर्ताओं को यह भी परामर्श दिया, “अधिक जानकारी के लिए भूकंप ऐप डाउनलोड करें।”

भूकंपीय गतिविधि निरंतर रही और नेपाल में 3.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। एक्स पर साझा किए गए एक अन्य जानकारी के अनुसार, “भूकंप की तीव्रता: 3.4, समय: 31/07/2026 01:18:42 भारतीय समय, अक्षांश: 27.102 उत्तर, देशांतर: 87.514 पूर्व, गहराई: 15 किलोमीटर, स्थान: नेपाल।”

कुछ घंटे पहले गुरुवार की देर रात राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने तिब्बत में 4.3 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया था। केंद्र ने बताया, “भूकंप की तीव्रता: 4.3, समय: 30/07/2026 23:25:39 भारतीय समय, अक्षांश: 30.379 उत्तर, देशांतर: 85.789 पूर्व, गहराई: 130 किलोमीटर, स्थान: तिब्बत।”

ये चारों भूकंप गुरुवार रात 11:25 बजे भारतीय समय से शुक्रवार प्रातः 1:44 बजे भारतीय समय के बीच आए। इसकी वजह से हिमालय क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों और पश्चिमी चीन में झटके महसूस किए गए। दर्ज की गई गहराई 10 किलोमीटर से लेकर 130 किलोमीटर तक रही।

भूकंप के बाद किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की तुरंत कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। अधिकारियों ने झटकों से जुड़ी कोई सुनामी चेतावनी या इमरजेंसी सलाह जारी नहीं की है।

चीन, तिब्बत और नेपाल के अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह तक कोई इमरजेंसी अपडेट जारी नहीं किया था।

हिमालय का इलाका, जिसमें नेपाल, तिब्बत और चीन के आसपास के इलाके शामिल हैं, दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप के लिहाज से एक्टिव जोन में से एक है। इसकी वजह भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों का लगातार टकराव है, जिससे अलग-अलग गहराई के भूकंप अक्सर आते रहते हैं।