Saturday, August 1, 2026
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31 जुलाई तक फॉरेक्स स्वैप सुविधा के तहत जुटाए गए 40.82 अरब डॉलर के विदेशी निवेश, एफसीएनआर(बी) जमा का सबसे बड़ा योगदान: आरबीआई

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नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए शुरू की गई रियायती स्वैप सुविधा को मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। केंद्रीय बैंक की ओर से शनिवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत 40.82 अरब डॉलर का कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह (फॉरेक्स इनफ्लो) दर्ज किया गया है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान फॉरेन करेंसी नॉन-रेसीडेंट (बैंक) यानी एफसीएनआर(बी) जमा का रहा है।

आरबीआई ने एक प्रेस नोट में बताया कि यह विशेष स्वैप सुविधा विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) को मजबूत करने और देश में विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

रिजर्व बैंक ने 5 जून 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया था कि वह एफसीएनआर(बी) जमा, ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स (ओएफसीबी) और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ईसीबी) के जरिए बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा जुटाने की योजना लागू करेगा। यह सुविधा 8 जून 2026 से प्रभावी हुई थी।

अधिकृत डीलर बैंकों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक जुटाई गई कुल राशि में 36.73 अरब डॉलर केवल एफसीएनआर(बी) जमा के माध्यम से आए हैं, जो कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह का सबसे बड़ा हिस्सा है।

इसके अलावा, ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स (ओएफसीबी) के जरिए 2.58 अरब डॉलर और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ईसीबी) के माध्यम से 1.52 अरब डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ। इस तरह 31 जुलाई तक कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़कर 40.82 अरब डॉलर पहुंच गया।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि नई एफसीएनआर(बी) जमा के लिए रियायती स्वैप सुविधा 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी। वहीं ओएफसीबी और ईसीबी के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी।

केंद्रीय बैंक का मानना है कि यह योजना भारत में विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाने और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आरबीआई की यह पहल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और वित्तीय स्थिरता को समर्थन देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।