Sunday, August 2, 2026
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कांग्रेस नेताओं ने परिसीमन पर राहुल गांधी के बयान का किया समर्थन, भाजपा ने किया पलटवार

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नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक बयान के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र की प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से कई राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और हित कमजोर होंगे। इस पर भाजपा और उसके सहयोगियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

शनिवार को चेन्नई के मामल्लापुरम में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने देश भर की राजनीतिक पार्टियों, खासकर तमिलनाडु की पार्टियों से परिसीमन के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी।

राहुल गांधी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह परिसीमन के जरिए तमिलनाडु के राजनीतिक प्रभाव को कम करना चाहती है। इससे राज्य का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और हित कमजोर होंगे।

उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों को संसद में एकजुट होकर उस कानून को हराना चाहिए जो राज्य के प्रतिनिधित्व को नुकसान पहुंचा सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित प्रक्रिया तमिलनाडु के लोगों को मताधिकार से वंचित करने और उनकी राजनीतिक ताकत छीनने के लिए बनाई गई है।

भाजपा ने जहां राहुल गांधी के बयान की कड़ी आलोचना की, वहीं कांग्रेस ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन दक्षिणी राज्यों के हितों के लिए बड़ा खतरा है।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने पत्रकारों से कहा, “परिसीमन को लेकर हम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि अगला हफ्ता तमिलनाडु के इतिहास में अहम होगा। तमिलनाडु की आवाज कम नहीं होनी चाहिए। परिसीमन तमिलनाडु के खिलाफ है। पहले भी तमिलनाडु के सभी 40 सांसदों ने इस परिसीमन के खिलाफ वोट किया था।”

उन्होंने कहा, “आप तमिलनाडु के हर सांसद से पूछिए कि वे परिसीमन को लेकर क्या करने वाले हैं। मैं भी उन सांसदों में से एक हूं और कह सकता हूं कि मैं इसके खिलाफ वोट करूंगा”।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि परिसीमन देश की एकता के लिए बड़ी चुनौती बनेगा। यह सभी दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ अन्याय होगा।

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा, “मैं परिसीमन के खिलाफ हूं और इसीलिए खिलाफ हूं, क्योंकि असम में जिस तरह से किया गया है। वहां बीजेपी की सरकार है और वे वोट के नजरिए से कर रहे हैं, प्रतिनिधित्व के नजरिए से नहीं, पूरी तरह वोट के नजरिए से।”

उन्होंने आगे कहा कि अगर हम संसद में आज मौजूद 543 सदस्यों को देखें तो मुझे लगता है कि हमारे कई लोग पूरी तरह भागीदारी नहीं कर पाते। हम संसद के अंदर बस एक छोटा हिस्सा रह जाते हैं। क्या संख्या बढ़ाना लोगों के लिए उचित होगा?”

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी और उसके सहयोगियों ने कहा कि कांग्रेस परिसीमन को खतरा मान रही है क्योंकि वह वंशवादी राजनीतिक पार्टी है।

भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कांग्रेस नेता पर पलटवार करते हुए कहा कि यह स्वाभाविक है कि परिसीमन के मुद्दे से सबसे ज्यादा प्रभावित पार्टियां वंशवादी राजनीतिक पार्टियां हैं। उन्हें डर है कि जब राजनीति में ज्यादा युवा आएंगे, जब सीटों की संख्या 50 फीसदी बढ़ेगी और जब गैर-वंशवादी और गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से युवा और महिलाएं बड़ी संख्या में राजनीति में आएंगी, तो अपनी-अपनी पार्टियों पर उनकी पकड़ और नियंत्रण कमजोर हो जाएगा।

सिन्हा ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “मैं राहुल गांधी को बताना चाहूंगा कि हमने बार-बार स्पष्ट किया है कि दक्षिणी राज्यों के साथ-साथ हर राज्य में सीटों की संख्या आनुपातिक आधार पर बढ़ेगी।”

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आईएएनएस से कहा, “राहुल गांधी हरसंभव कोशिश कर रहे हैं कि सरकार कोई बड़ा काम, कोई अच्छा काम या देशहित का काम न कर पाए, क्योंकि वह विदेशी ताकतों के इशारे पर नाचते हैं लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुने गए सांसद ये सारी बातें समझते हैं।”

राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी प्रस्तावित प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा, “कांग्रेस को लगता है कि अगर परिसीमन हुआ तो वे अपनी जगह खो देंगे। आज कुछ लोकसभा सीटों की आबादी 50 लाख है, जबकि कुछ में सिर्फ 1 लाख लोग हैं। इसलिए यह प्रक्रिया करनी ही होगी। परिसीमन होना चाहिए।”

जनता दल-यूनाइटेड के एमएलसी नीरज कुमार सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर संविधान के दायरे में बहस होनी चाहिए, इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

आईएएनएस से बात करते हुए जेडीयू एमएलसी ने कहा, “परिसीमन में हर राजनीतिक पार्टी को अपनी भूमिका तय करनी होगी। और देश के संविधान के संवैधानिक ढांचे के तहत परिसीमन जरूरी है।”

भाजपा नेता टी.आर. श्रीनिवास ने भी राहुल गांधी के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा, “परिसीमन प्रक्रिया पर राहुल गांधी ने कल तमिलनाडु में कहा कि यह भाजपा की साजिश है ताकि तमिलनाडु से सत्ता छीनी जाए। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे पास ऐसा अपरिपक्व नेता प्रतिपक्ष है जो प्रोपेगेंडा का नेता बनकर दिन-रात फर्जी खबरें फैलाता है। वे संविधान को ठीक से पढ़ते नहीं हैं, लेकिन उसे लेकर घूमते हैं ताकि दिखा सकें कि वे संविधान को बहुत अच्छे से जानते हैं।”