अहमदाबाद, 2 अगस्त (आईएएनएस)। अहमदाबाद सिविल अस्पताल में एक ढाई साल के बच्चे की सफल सर्जरी हुई है, जिसका जन्म एक दुर्लभ बीमारी के साथ हुआ था। बच्चे की भोजन नली ठीक से बनी ही नहीं थी।
अहमदाबाद सिविल अस्पताल में जटिल सर्जरी के बाद अब वह बच्चा मुंह से खाना खाने लगा है। अस्पताल के अधिकारियों ने रविवार को बताया कि यह बाल रोग सर्जरी विभाग की एक और सफल उपलब्धि है।
बच्चे का नाम मंतव्य है। वह अहमदाबाद जिले के सानंद निवासी शैलेश पटेल का बेटा है। उसका जन्म 7 नवंबर 2023 को हुआ था। उसे ‘प्योर ओसोफेगल एट्रेसिया’ नाम की दुर्लभ जन्मजात बीमारी थी। इसमें भोजन नली के दोनों सिरे इतने दूर होते हैं कि एक पूरी नली नहीं बन पाती।
इस वजह से जन्म से ही वह मुंह से दूध या खाना नहीं पी/खा पा रहा था।
उसकी जान बचाने के लिए जन्म के दूसरे दिन ही सर्जनों ने गले में एक छेद कर ‘ओसोफेगोस्टोमी’ और पेट में सीधे नली डालकर ‘गैस्ट्रोस्टोमी’ की थी। इसके बाद उसे नली के जरिए तरल आहार दिया जा रहा था और नियमित जांच भी होती थी।
जब उसकी पोषण स्थिति, वजन और शारीरिक विकास ठीक हो गया तो डॉक्टरों ने भोजन नली की पक्की सर्जरी करने का फैसला किया।
यह ऑपरेशन 3 जुलाई को ‘एडवांस्ड गैस्ट्रिक पुल-अप’ तकनीक से किया गया। इसमें पेट के हिस्से का इस्तेमाल करके नई भोजन नली बनाई जाती है।
सर्जरी अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और बाल रोग सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. राकेश जोशी के नेतृत्व वाली टीम ने की। टीम में डॉ. जयश्री रामजी और एनेस्थीसिया डॉक्टर अदिति और सोनल भलावत भी शामिल थे।
ऑपरेशन के 23 दिन बाद मंतव्य ने पहली बार मुंह से खाना खाया।
डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा बिना किसी परेशानी के ठीक हो गया है और अब उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
मेडिकल आंकड़ों के अनुसार, ‘ट्रेको-ओसोफेगल फिस्टुला’, यानी टीओएफ, हर 2500 से 4000 में से 1 बच्चे में होता है, लेकिन ‘प्योर ओसोफेगल एट्रेसिया’ के मामलों में, जहां भोजन नली के सिरे बहुत दूर होते हैं, वहां ‘गैस्ट्रिक पुल-अप’ सर्जरी ही सबसे कारगर इलाज मानी जाती है। इसकी सफलता दर 85 से 90 प्रतिशत बताई जाती है।
डॉ. राकेश जोशी ने कहा, “इस तरह की सर्जरी के लिए बहुत विशेष तकनीकी दक्षता और अनुभवी टीम चाहिए। बच्चे का पोषण बनाए रखना और सही समय पर ऑपरेशन करना ही सफलता की कुंजी है। यह एडवांस सर्जरी जो निजी अस्पतालों में बहुत महंगी मानी जाती है, वह अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मुफ्त उपलब्ध है। पिछले एक साल में हमारी टीम ने ऐसे 7 जटिल केस सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।”
बच्चे के माता-पिता ने कहा कि वे अपने बेटे को पहली बार मुंह से खाते देखकर बहुत भावुक हो गए। उन्होंने इलाज में शामिल सभी डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ का आभार जताया।

