Friday, August 14, 2026
SGSU Advertisement
Home राजनीति जम्मू-कश्मीर: पुलवामा में हाई-डेंसिटी सेब की तुड़ाई शुरू, बंपर फसल से किसान...

जम्मू-कश्मीर: पुलवामा में हाई-डेंसिटी सेब की तुड़ाई शुरू, बंपर फसल से किसान खुश, कृषि विभाग ने सही आकार का इंतजार करने को कहा

0
18

पुलवामा, 2 अगस्त (आईएएनएस)। घाटी में सेब सीजन की शुरुआत हो गई है। पुलवामा जिले में हाई-डेंसिटी वाले सेबों की तुड़ाई शुरू हो चुकी है। बंपर पैदावार से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। साथ ही बागवानों और कृषि विभाग ने उत्पादकों और फल एजेंटों से अपील की है कि जल्दी मुनाफे के चक्कर में कच्चा फल न तोड़ें। सेब के सही आकार और रंग का इंतजार करने पर ही बेहतर दाम मिलेगा।

एक सेब किसान ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “पारंपरिक बागों की तुलना में हाई-डेंसिटी सेब की खेती के कई फायदे हैं। हमारे इलाके में पारंपरिक सेब के पेड़ों पर फल आने में 10-15 साल लग जाते हैं, जबकि हाई-डेंसिटी वाली किस्मों, खासकर इटैलियन गाला किस्म में फल बहुत पहले आ जाते हैं। सेबों का रंग जल्दी आता है और वे बाजार में भी जल्दी पहुंचते हैं, जिससे किसानों को फायदा होता है। इस साल फसल भी बंपर है। अब बस उम्मीद है कि मार्केट में अच्छा रेट मिले।”

किसान का कहना है कि हाई-डेंसिटी बागों में प्रति एकड़ उत्पादन ज्यादा होता है और रखरखाव भी आसान है। ड्रिप इरिगेशन और आधुनिक तकनीक से पैदावार बढ़ी है, लेकिन गुणवत्ता बनाए रखना सबसे जरूरी है।

मुख्य बागवानी अधिकारी रियाज अहमद शाह ने बताया, “पुलवामा में हाई-डेंसिटी वाले सेब की तुड़ाई शुरू हो गई है। हमारी फसल, चाहे वह हाई-डेंसिटी वाली हो या हमारी पारंपरिक बागवानी वाली, उसका अपना एक समय होता है। फूल आने से लेकर फल तोड़ने तक एक अंतराल होता है। इसमें थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है, लेकिन औसतन एक निश्चित समय-सीमा होती है।”

उन्होंने आगे कहा, “कई ऐसे संकेत हैं, जिनसे हमें पता चलता है कि फल कटाई के लिए तैयार है या नहीं। रंग, आकार, मिठास और तने से अलग होने की क्षमता देखी जाती है। मेरी बागवानों से अपील है कि वे थोड़ा इंतजार करें। अगर सेब पूरी तरह पककर सही साइज और रंग का होगा तो न सिर्फ क्वालिटी बेहतर होगी, बल्कि मंडियों में भी दाम अच्छा मिलेगा। जल्दी तुड़ाई से बाजार खराब होता है और किसान को नुकसान होता है।”

कृषि विभाग के अनुसार इस साल पुलवामा में हाई-डेंसिटी सेब के रकबे में इजाफा हुआ है। सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी पर पौधे और तकनीकी मदद मिलने से युवा किसान भी इस ओर आकर्षित हो रहे हैं।