सोल, 4 अगस्त (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया की कैबिनेट ने मंगलवार को हाल ही में पास हुए न्यायिक सुधार संबंधी कानून को मंजूरी दे दी। इससे अभियोजक के पास जांच का अधिकार नहीं होगा। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इसे “ज्यूडिशियल नॉर्मलाइजेशन” यानी देश की न्यायिक व्यवस्था को अधिक संतुलित और सामान्य बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम बताया।
कैबिनेट ने क्रिमिनल प्रोसीजर एक्ट में बदलाव को मंजूरी दे दी, जो पिछले हफ्ते नेशनल असेंबली से पास हुआ था, लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी पीपल पावर पार्टी (पीपीपी) ने इसका बायकॉट किया था।
योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में संसद से पारित संशोधन के तहत अभियोजकों के प्रत्यक्ष आपराधिक जांच करने के अधिकार लगभग समाप्त हो जाएंगे। भविष्य में अधिकांश आपराधिक मामलों की प्रत्यक्ष जांच पुलिस करेगी, जबकि अभियोजन पक्ष मुख्य रूप से मुकदमा चलाने और कानूनी कार्रवाई तक सीमित रहेगा।
इससे पहले, कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रपति ली ने कहा, “वर्षों से चली आ रही उस व्यवस्था में बदलाव का समय आ गया है, जिसमें अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) के पास जांच और अभियोजन, दोनों की व्यापक शक्तियां थीं।” उनके मुताबिक, नई व्यवस्था का उद्देश्य इन दोनों अधिकारों को अलग-अलग संस्थाओं के बीच बांटना है ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ सके।
हालांकि, मुख्य विपक्षी दल ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जांच एजेंसियों की शक्तियों में बदलाव कर न्यायिक प्रणाली को कमजोर कर रही है। विपक्ष ने राष्ट्रपति से विधेयक पर वीटो लगाने की मांग भी की थी।
राष्ट्रपति ने कहा, ” यह सुधार किसी संस्था को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि जांच और अभियोजन की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से अलग करने तथा न्यायिक व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।”
ली ने कहा कि पिछले कुछ दशकों से वकीलों ने आरोप लगाने से लेकर “बहुत ज्यादा” अधिकार का इस्तेमाल किया है। जिससे एक अजीब सिस्टम बन गया है, जिसमें उन्होंने कभी-कभी कुछ मामलों को दबाने या टारगेट करने के लिए अपनी सत्ता का दुरुपयोग किया है।

