नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मादक पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया है। इसके तहत 27 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते और 19 देशों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए गए हैं।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि भारत म्यांमार, नेपाल, थाईलैंड, श्रीलंका, इंडोनेशिया, सिंगापुर और अमेरिका जैसे देशों के साथ नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों पर नियमित रूप से महानिदेशक (डीजी) स्तर और द्विपक्षीय वार्ता करता है।
सांसद नरेश गणपत म्हस्के और श्रीकांत शिंदे के सवालों का जवाब देते हुए राय ने कहा कि अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के दुरुपयोग से निपटने के लिए 26 जून को ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)’ जारी किया गया है। इसमें अगले तीन वर्षों के लिए स्पष्ट प्राथमिकताएं और समयबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं। इसका उद्देश्य ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ की भागीदारी से नशीले पदार्थों पर नियंत्रण पाना है।
उन्होंने बताया कि एनसीबी ने केंद्र और राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा अन्य संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय के लिए चार स्तरीय नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) तंत्र भी स्थापित किया है।
एनसीओआरडी पोर्टल मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन से जुड़ी जानकारी के लिए एकीकृत मंच के रूप में काम करता है।
राय ने कहा कि इस पोर्टल पर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण, मादक पदार्थ अपराधियों का डेटा, कानूनी जानकारी और राज्यों द्वारा की गई बेहतर पहलों जैसी जानकारियां उपलब्ध हैं।
गृह राज्य मंत्री ने बताया कि मादक पदार्थों के बड़े और महत्वपूर्ण मामलों, खासकर नार्को-टेररिज्म से जुड़े मामलों की जांच की निगरानी के लिए एनसीबी के महानिदेशक अनुराग गर्ग की अध्यक्षता में एक संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) का गठन किया गया है।
अब तक केंद्रीय स्तर पर जेसीसी की 11 और राज्य स्तर पर 75 बैठकों का आयोजन किया जा चुका है।
राय ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) से बीट कांस्टेबल, फील्ड अधिकारियों और थाना प्रभारियों को संवेदनशील बनाने का अनुरोध किया गया है। उन्हें सिंथेटिक ड्रग्स, विशेष रूप से मेफेड्रोन और एम्फेटामाइन श्रेणी के उत्तेजक पदार्थों के गुप्त निर्माण से जुड़े जोखिमों और चेतावनी संकेतों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि वित्तीय जांच को मजबूत करने और अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान, पता लगाने तथा जब्ती की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।

