दतिया, 4 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर दतिया जिला भाजपा की पूरी संगठनात्मक संरचना तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई है। इस कार्रवाई के तहत जिलाध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, जिला कार्यसमिति, मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों सहित समस्त जिला संगठन की वर्तमान इकाइयों को पदमुक्त कर दिया गया है।
पार्टी की ओर से जारी अनुशासनात्मक आदेश में कहा गया है कि यह निर्णय दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणामों की समीक्षा के लिए गठित समिति की अनुशंसा के आधार पर लिया गया है।
इससे पहले मंगलवार को भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने उपचुनाव में मिली हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया था। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा गठित इस समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को शामिल किया गया है। समिति को चुनाव से जुड़े पार्टी पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर हार के कारणों का विश्लेषण करने तथा अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई थी।
प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने आईएएनएस से कहा था कि समिति जिम्मेदार पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर चुनाव परिणामों के कारणों का विश्लेषण करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपेगी।
सोमवार को घोषित दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों में सत्तारूढ़ भाजपा को बड़ा झटका लगा था। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी अशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से पराजित किया। घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले, जबकि अशुतोष तिवारी को 60,741 मत प्राप्त हुए। आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव 22,527 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के पराजित उम्मीदवार अशुतोष तिवारी ने आरोप लगाया था कि पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ काम किया, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार को जीत मिली। इसके बाद पार्टी ने हार के कारणों की समीक्षा और कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों की जांच का निर्णय लिया था।
यह घटनाक्रम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के उस बयान के बाद सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि दतिया उपचुनाव में हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि 30 जुलाई को हुए दतिया विधानसभा उपचुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा था। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं ने पूरी ताकत झोंकी थी।

