कोलकाता, 5 अगस्त (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करेंगे, जिसमें उन्होंने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी है।
पिछले महीने इसी पीठ ने अभिषेक बनर्जी की आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने उन्हें पहले कोलकाता स्थित सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेने की सलाह दी थी।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा था कि एसएसकेएम अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद ही अदालत इस मामले में आगे कोई निर्णय लेगी।
इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने इसी अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हालांकि, पिछले सप्ताह भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वेंकटा सुब्रमणि मोहन की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले को वापस कलकत्ता हाईकोर्ट भेज दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह सात दिनों के भीतर इस मामले में फैसला करे। इसी के अनुरूप न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने बुधवार सुबह 11 बजे इस मामले की सुनवाई निर्धारित की है।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने यह सवाल भी उठाया था कि क्या डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लिया है।
उसी दिन न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कथित हेट स्पीच मामले में अभिषेक बनर्जी को अक्टूबर तक गिरफ्तारी सहित किसी भी प्रकार की कठोर पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत भी प्रदान की थी। इस मामले में उन पर हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक चुनावी रैली में हिंसा भड़काने वाले बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
साथ ही, न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने अभिषेक बनर्जी को जांच में पुलिस का सहयोग करने का निर्देश दिया और राज्य की आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को भी मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी करने के लिए कहा।
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद जिले में एक पार्टी कार्यक्रम से कोलकाता लौटते समय अभिषेक बनर्जी सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। इस दुर्घटना में उनकी आंख में गंभीर चोट आई थी। शुरुआत में उन्होंने देश के कई अस्पतालों में इलाज कराया और बाद में बेहतर उपचार के लिए विदेश भी गए।

