नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस के शाहदरा साइबर थाना ने शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ निवेश के नाम पर ठगी करने वाले साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश करते हुए ओडिशा के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जीवाड़े से हासिल धन को विभिन्न बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजने में मदद करता था।
जांच में पता चला है कि उसके एक बैंक खाते में मात्र दो महीनों के दौरान करीब 2.97 करोड़ रुपए जमा हुए थे। यह खाता देशभर में दर्ज 17 साइबर धोखाधड़ी मामलों से जुड़ा पाया गया है।
यह कार्रवाई ई-एफआईआर संख्या 75/2026 के तहत की गई, जो 1 अप्रैल 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के अंतर्गत दर्ज की गई थी। यह मामला रामचंद्र यादव की शिकायत पर दर्ज हुआ था।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता को एक व्हाट्सएप समूह में निवेश के लिए जोड़ा गया था। वहां ठग खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ और निवेश सलाहकार बताकर लोगों को ऊंचे और सुनिश्चित मुनाफे का लालच देते थे। उन्होंने शिकायतकर्ता को शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ में निवेश करने के लिए प्रेरित किया।
भरोसा जीतने के लिए ठगों ने फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और ऐप पर नकली मुनाफा दिखाया। इन दावों को सही मानकर शिकायतकर्ता ने यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए कुल 4.75 लाख रुपए निवेश कर दिए। बाद में जब उसने मुनाफा निकालने की कोशिश की तो उससे 12 लाख रुपए अतिरिक्त शुल्क मांगा गया। तब उसे ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया।
मामले की जांच के लिए इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा, एएसआई राजदीप, हेड कांस्टेबल जावेद, नरेंद्र और दीपक तथा कांस्टेबल रंजीत की टीम का गठन किया गया। टीम ने ठगी की रकम के वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की।
जांच में सामने आया कि ठगी की गई राशि में से लगभग 3.75 लाख रुपए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के फ्यूजन एंटरप्राइजेज नामक खाते में भेजे गए थे। यह कॉर्पोरेट खाता सुब्रत कुमार साहू और संतोष कुमार लेंका के नाम पर भुवनेश्वर में पंजीकृत था। तकनीकी विश्लेषण में पता चला कि खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर सुब्रत कुमार साहू के नाम पर दर्ज था।
तकनीकी निगरानी और कानूनी प्रक्रिया के बाद पुलिस ने 33 वर्षीय सुब्रत कुमार साहू को भुवनेश्वर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने अवैध वित्तीय लेनदेन के लिए कई बैंक खाते खुलवाए और संचालित किए थे। उसने बताया कि वह लगभग सात बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहा था, जिनमें कॉर्पोरेट और बचत खाते शामिल थे।
पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की जांच में सह-आरोपियों के साथ बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित बातचीत भी बरामद की है। आरोपी ने यह भी बताया कि बैंक खाते से जुड़ा सिम कार्ड बाद में फेंक दिया गया था।
खाते की जांच में पता चला कि लगभग दो महीने की अवधि में उसमें 2,97,33,000 रुपए जमा किए गए थे। जांचकर्ताओं को यह भी जानकारी मिली कि साहू और उसके सहयोगी लेंका इस खाते से जुड़ी गतिविधियों के सिलसिले में हवाई मार्ग से गुवाहाटी गए थे।
पुलिस के अनुसार यह खाता देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज 17 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़ा है, जिससे संकेत मिलता है कि इसका इस्तेमाल कई ऑनलाइन ठगी मामलों में किया गया हो सकता है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि ठग व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। शुरुआत में लोगों को छोटी रकम निवेश करने के लिए कहा जाता था और फर्जी ऐप के माध्यम से नकली मुनाफा दिखाया जाता था। कुछ मामलों में भरोसा बढ़ाने के लिए थोड़ी रकम निकालने की अनुमति भी दी जाती थी।
जब पीड़ितों का भरोसा जीत लिया जाता था, तब उन्हें बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था। बाद में पैसे निकालने के समय टैक्स, सत्यापन शुल्क, अनुपालन शुल्क या प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाती थी। पर्याप्त धन वसूलने के बाद आरोपी संपर्क तोड़ देते थे।
पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किया है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, पूरे वित्तीय नेटवर्क तथा साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए अन्य बैंक खातों का पता लगाने में जुटी हुई है।
दिल्ली पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या अनजान निवेश ऐप के जरिए निवेश करते समय पूरी सावधानी बरतें और किसी भी लालच में आकर पैसा निवेश न करें।

