Wednesday, August 12, 2026
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2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए निष्पक्ष व्यापार और सर्कुलर इकोनॉमी अपनाने की जरूरत: पीयूष गोयल

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नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को भारतीय उद्योग जगत, कारोबारियों और नागरिकों से निष्पक्ष व्यापार, रीसाइक्लिंग, पुनः उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, तो आर्थिक विकास के साथ-साथ टिकाऊ और जिम्मेदार कारोबारी मॉडल को भी बढ़ावा देना होगा।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित भारतीय व्यापार महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती आर्थिक भागीदारी और विभिन्न देशों के साथ मजबूत होते व्यापारिक संबंध भारतीय उद्योगों के लिए बड़े अवसर लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के सामने अपने उत्पादों और सेवाओं को अधिक मजबूती के साथ प्रस्तुत करने की स्थिति में है।

मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं, जिनकी बदौलत भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्राथमिकता आधारित पहुंच मिल रही है। इससे भारतीय निर्यातकों, उद्योगों और सेवा क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।

पीयूष गोयल ने भारत के निर्यात प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि देश के एमएसएमई, किसान, मछुआरे, उद्यमी, श्रमिक और सेवा क्षेत्र ने निर्यात बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान में लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की है और सरकार का लक्ष्य इसे 2047 तक बढ़ाकर 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि देश का वस्तु और सेवा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है और सरकार ने चालू वर्ष के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले छह वर्षों में भारत का निर्यात लगभग 73 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जुलाई अवधि के दौरान निर्यात में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

गोयल ने जोर देते हुए कहा कि भारतीय उद्योगों को केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए। उनके अनुसार, गुणवत्ता, डिजाइन और नवाचार पर विशेष ध्यान देकर ‘मेक इन इंडिया’ ब्रांड को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि भारतीय उपभोक्ता अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाते हैं, तो उत्पादन बढ़ेगा, बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था विकसित होगी और भारतीय कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और मजबूत बनेंगी।

मंत्री ने कारोबारियों और उद्यमियों से अपने व्यवसायों के डिजिटलीकरण पर जोर देने, बेहतर विनिर्माण प्रक्रियाएं अपनाने और निष्पक्ष व्यापारिक प्रथाओं का पालन करने की अपील की। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक और पारदर्शी कारोबारी व्यवस्था भारतीय उद्योगों को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को टिकाऊ विकास के सिद्धांतों पर आधारित होना होगा। उन्होंने उद्योग जगत से रीसाइक्लिंग, पुनः उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उनका मानना है कि संसाधनों के बेहतर उपयोग से न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा, बल्कि आर्थिक दक्षता भी बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए देश के नागरिकों को भी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए।

गोयल ने अपने संबोधन में डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसी सरकारी पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश ने उद्योगों को मजबूत किया है और देश के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित किए हैं।

अपने संबोधन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उद्योग जगत, एमएसएमई, किसान, मछुआरे, श्रमिक और उद्यमियों के सामूहिक प्रयास भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक और अधिक प्रभावशाली तथा मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत के पास दुनिया की विकास गाथा का प्रमुख केंद्र बनने का ऐतिहासिक अवसर है।