Thursday, August 13, 2026
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बांग्लादेश भागने की फिराक में था पाकिस्तानी जासूस वहाब आलम, पूछताछ में बड़े खुलासे

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कोलकाता, 13 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिले में स्थित हाबरा से गिरफ्तार पाकिस्तानी नागरिक वहाब आलम कुछ समय के लिए बांग्लादेश भागने की फिराक में था। वह बांग्लादेश में कुछ समय बिताकर नई पहचान और नए काम के साथ वापस पश्चिम बंगाल लौटना चाहता था।

स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की पूछताछ में वहाब आलम ने कई अहम खुलासे किए हैं। सूत्रों के अनुसार उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भेजा था। उसका काम देश के पूर्वी हिस्से में भारतीय सेना, नौसेना और रेलवे की जानकारी जुटाना था।

पूछताछ में वहाब आलम ने बताया कि पाकिस्तान में बैठे उसके आकाओं ने उसे सलाह दी थी कि वह कुछ समय के लिए बांग्लादेश चला जाए। एसटीएफ ने आलम के नेटबुक की जांच के दौरान बांग्लादेश में मौजूद एक आईएसआई एजेंट पवेल की जानकारी भी हासिल की है। वहाब आलम को बांग्लादेश भागने के बाद इसी पवेल से मिलना था।

सूत्रों ने बताया कि पवेल अभी बांग्लादेश के जेसोर में सक्रिय है। उसे वहाब आलम आलम के लिए बांग्लादेश में कुछ समय के लिए सुरक्षित ठिकाना तय करना था। इसके बाद उसे पश्चिम बंगाल में मिलने वाले नए काम की जानकारी देनी थी और फिर कुछ समय बाद उसे वापस राज्य में भेजना था।

वहाब आलम ने माना कि इस साल की शुरुआत में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले हुए एसआईआर के बाद उसका नाम मतदाता सूची से हट गया था। इसके बाद वह और पाकिस्तान में बैठे उसके आका सतर्क हो गए थे।

उसके आकाओं ने उसे सलाह दी कि वह टॉपसिया को छोड़ दे, जहां वह पहले मतदाता के रूप में दर्ज था। इसके बाद भारत-बांग्लादेश से लगने वाले पश्चिम बंगाल के किसी सीमावर्ती जिले में कुछ समय छिपकर रहे और मौका मिलते ही बांग्लादेश भाग जाए।

इसी योजना के तहत उसने उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा में शरण लेने का फैसला किया। एसटीएफ के जवानों ने उसे यहीं से गिरफ्तार किया। वहाब आलम से पूछताछ के आधार पर एसटीएफ ने टॉपसिया में उसके स्थानीय सहयोगी मोहम्मद इजाज को भी गिरफ्तार किया।

जांच में पता चला कि वहाब आलम टॉपसिया में मोहम्मद इजाज के घर किरायेदार के रूप में रहता था। इजाज ने ही आलम के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और आखिर में वोटर कार्ड जैसे नकली भारतीय पहचान पत्र बनवाने में मदद की थी।

वहाब आलम 2012 में भारत-नेपाल सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था। इसके बाद से वह राज्य के अलग-अलग इलाकों में अपना ठिकाना बदल-बदलकर रह रहा था।