नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर भारत विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि यह दिवस देश के विभाजन की उस भयावह त्रासदी की याद दिलाता है, जिसने लाखों परिवारों के जीवन को गहरे दुख, विस्थापन और अनिश्चितता से भर दिया था।
रक्षामंत्री ने कहा कि भारत का विभाजन केवल इतिहास का एक पीड़ादायक अध्याय नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य की भी स्मृति है, जिन्होंने उस कठिन दौर में अपना घर-परिवार, संपत्ति और अपने प्रियजनों को खो दिया। इसके बावजूद उन्होंने अपने जीवन को दोबारा संवारने और आगे बढ़ने का संकल्प दिखाया।
उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी में विस्थापित हुए लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। अपने घर और जन्मभूमि से दूर जाकर उन्हें नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ा। अनेक परिवारों ने अपनों को खोया, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और देश के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि इतिहास से सीख लेने का भी दिन है। इतिहास की पीड़ाओं को केवल स्मृति में संजोकर रखना पर्याप्त नहीं है। उनसे सबक लेकर ऐसा मजबूत, समरस और संवेदनशील भारत बनाना जरूरी है, जहां विभाजन जैसी त्रासदी का दंश भविष्य में किसी समाज को दोबारा न झेलना पड़े।
रक्षामंत्री ने देशवासियों से इतिहास के इस दुखद अध्याय को याद करते हुए एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनशीलता को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उनका बलिदान देश हमेशा याद रखेगा। साथ ही, अपनी जन्मभूमि और जड़ों से विस्थापित होने वाले अनगिनत परिवारों का संघर्ष भी भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राजनाथ सिंह ने कहा, “देश के विभाजन की विभीषिका में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात लोगों तथा अपनी जन्मभूमि और जड़ों से विस्थापित होने वाले अनगिनत परिवारों के प्रति मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।” विभाजन की पीड़ा को याद करना वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद करता है कि देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। यह दिवस भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है, जहां विविधताओं के बावजूद समाज में आपसी विश्वास, भाईचारा और एकता कायम रहे।
उन्होंने कहा, “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ हमें भारत के विभाजन की त्रासदी का स्मरण कराता है, जिसने लाखों परिवारों के जीवन को गहरे दुख, विस्थापन और अनिश्चितता से भर दिया। यह केवल इतिहास का एक पीड़ादायक अध्याय नहीं, बल्कि उन अनगिनत लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य की स्मृति भी है, जिन्होंने अपना घर-परिवार, संपत्ति और स्वजनों को खोने के बावजूद, जीवन को पुन: संवारने का संकल्प दिखाया।”
–आईएएनएस
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