गांधीनगर, 14 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और डिप्टी सीएम हर्ष सिंघवी ने शुक्रवार को विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने आजादी के बाद भारत के विभाजन के समय में अपनी जान गंवाई थी और विस्थापित होने का दर्द सहा था।
अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में सीएम भूपेंद्र पटेल ने विभाजन को भौगोलिक सीमा रेखा के निर्धारण से परे बताया। उन्होंने इस विभाजन को काला अध्याय, अत्याधिक पीड़ा, विस्थापन और करोड़ों लोगों के द्वारा झेले जाने वाला दर्द बताया।
सीएम पटेल ने कहा, “विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर मैं उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने विभाजन की त्रासदी में अपनी जान गंवाई।
साथ ही, उन्होंने उन सभी लोगों को भी याद किया, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए अपने मातृत्व भूमि, अपने संगे संबंधियों और अपने घर को छोड़ने के दौरान महसूस किया।
संघवी ने अपने अलग संदेश में उन लोगों को भी याद किया, जो विभाजन से प्रभावित हुए थे। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर उन्होंने कहा कि मैं उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने विभाजन की विभीषिका और विस्थापन का दर्द सहा।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हर वर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में इसे मनाने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि यह दिवस उन सभी लोगों के स्मरण में मनाया जाएगा, जिन्होंने राष्ट्र विभाजन के दौरान संघर्ष और पीड़ा सही थी। इन लोगों ने भी सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में अपनी तरफ से अमूल्य योगदान दिया था।
आधुनिक भारत में 1947 का विभाजन सामूहिक विस्थापन का कारण बना था। उस दौरान कई लोग भारत और पाकिस्तान में जाकर बसे थे और यह सब कुछ व्यापक हिंसा और सांप्रदायिक तनाव के बीच हुआ था।
सरकार ने विभीषिका की स्मृति दिवस मनाने का फैसला ही इसलिए किया था, ताकि उन लोगों के दर्द को याद किया जाए, जिन्होंने अपना घर छोड़ने के दौरान महसूस किया था।
स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पूर्व ही यह स्मरण दिवस मनाया जाता है। गुजरात भी हर घर तिरंगा अभियान में हिस्सा ले रहा है। यह अभियान राष्ट्रव्यापी स्तर पर 9 से 17 अगस्त को मनाया जाता है।
हर्ष सिंघवी के मुताबिक पूरे राज्य में 1200 तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। 70 लाख घरों में तिरंगे का प्रदर्शन करने के लिए इस अभियान की शुरुआत की गई है।
वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को उन सभी लोगों को भी श्रद्धांजलि दी, जो आजादी के बाद हुए विभाजन से प्रभावित हुए थे। साथ ही, प्रधानमंत्री ने आजादी के दौरान अपनी साहस का परिचय देने वाले लोगों के शौर्य को भी याद किया।

