मुंबई, 17 अगस्त (आईएएनएस)। सोनिया गांधी और ‘वंदे मातरम’ विवाद, महबूबा मुफ्ती के बयान सहित कई मामलो पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई की प्रतिक्रिया सामने आई है।
आईएएनएस से हुसैन दलवई ने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी के नॉवेल में ‘वंदे मातरम’ लिखा गया है। इसके दो स्टैंजा को मान्यता देनी चाहिए और उतना ही गाना चाहिए, ऐसा रवींद्रनाथ ठाकुर ने 1885 में कांग्रेस के अधिवेशन में कहा था और तब से हमेशा दो स्टैंजा बोले जाते हैं।” उन्होंने कहा कि मैं गणपति की पूजा करने के लिए जाता हूं, मुझे कोई आपत्ति नहीं है। गांव के मंदिर में भी मैं जाता हूं। इसको लेकर कोई सवाल नहीं है। मुसलमानों से मेरी अपील है कि इसको सम्मान दें और बोलने की जरूरत नहीं है।
सोनिया गांधी को लेकर उन्होंने कहा कि उनका स्टैंड सही है। कांग्रेस को सोनिया गांधी के साथ खड़े रहना चाहिए। ‘वंदे मातरम’ को लेकर जो कानून बनाया गया है, वह गलत है। कांग्रेस को यह मानना चाहिए और लोगों को बताना चाहिए। इसका मतलब यह हिंदुओं के खिलाफ है, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का नारा देकर लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। समाज में दरार नहीं करना चाहिए, सब लोगों को साथ लाना चाहिए। कांग्रेस ने हमेशा सबको इकट्ठा किया। इसलिए यह देश अभी तक एक रहा है। मैं सोनिया गांधी के साथ हूं। सोनिया गांधी को बहुत तकलीफ दी गई थी, लेकिन एक जमाने में इनको बगल करके उन्होंने सरकार बनाई थी। सोनिया गांधी हिम्मत वाली महिला हैं।
‘दिमागी नक्सल’ को लेकर हुसैन दलवई ने कहा कि उनको (भाजपा) लोगों को तकलीफ देनी है; उनके हिंदुत्ववाद से अलग दूसरा कोई विचार ही नहीं होना चाहिए, इसलिए उन्होंने ‘वंदे मातरम’ लाया। यह बिल्कुल गलत बात है। उनका ‘दिमागी हिंदुत्व’ भी गलत है। पहले इसके बारे में बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉकरोच पार्टी और राहुल गांधी ने उनके (भाजपा) सामने जिस तरह की चुनौती खड़ी की है, उसका उत्तर देने के लिए उनके पास मजबूत कोई मुद्दा नहीं है। इसलिए इस तरह के मुद्दे उनकी ओर से निकाले जा रहे हैं। मैं कहना चाहता हूं कि उनकी ओर से बड़े पैमाने पर फसाद भी किया जाएगा।
हुसैन दलवई ने कहा कि 2029 के चुनाव में वे (भाजपा) क्या करेंगे। उनकी ओर से फसाद और दरार पैदा करके किसी तरह से चुनाव जीतने की कोशिश की जाएगी; यही उनका धंधा है। भाजपा की ओर से ही दंगा किया जाता है।
बाबा रामदेव के बयान पर हुसैन दलवई ने कहा कि उनकी ओर से छात्रों के हित के लिए भी बातें की गई हैं; पहली बार उन्होंने दिमाग की बात की है, उसका स्वागत करना चाहिए। उनको समझना चाहिए छात्र सड़कों पर क्यों आए हैं। पहले उनको पढ़ाई करना चाहिए।
गोपीनाथ मुंडे को लेकर कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण के बयान पर हुसैन दलवई ने कहा कि पृथ्वीराज चव्हाण की बात सही है, गोपीनाथ मुंडे कांग्रेस में आने के लिए तैयार थे। वे सोनिया गांधी से मिलने के लिए जा रहे थे तो अहमद पटेल ने फोन किया था कि पहले वे इस्तीफा दें, फिर चुनाव लड़कर आएं, तब मंत्री बनाया जाएगा। इसलिए वे डरकर नहीं आए।
हुसैन दलवई ने कहा कि जब पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री थे, तब एकनाथ शिंदे भी कांग्रेस में आने के लिए तैयार थे। एकनाथ शिंदे ने कहा था कि अगर मुझे पार्टी में लेंगे तो ठाणे जिला और पालघर आपके साथ लाऊंगा लेकिन हमारे कुछ लोगों की ओर से इसका विरोध किया गया।
महाराष्ट्र में मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर हुसैन दलवई ने कहा कि गरीब लोग रिक्शा चलाते हैं, रिक्शा भी उनकी नहीं होती। अगर मैं मराठी में उससे कुछ बोलूं तो उसे मराठी समझ आनी चाहिए। हालांकि जबरदस्ती करना ठीक नहीं है। यह जानबूझकर किया जा रहा है। गरीबों के खिलाफ कुछ भी नहीं चलेगा।

