रांची, 17 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने आंदोलनकारियों की सबसे बड़ी मांग मानते हुए वर्ष 2024 में आयोजित जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया है। इसके अलावा टीडीपीएल नामक एजेंसी द्वारा राज्य में कराई गई सभी प्रतियोगिता परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में करीब साढ़े चार घंटे की चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया।
दूसरी तरफ, रांची में भूख हड़ताल कर रही छात्रा हबीबा की तबीयत बिगड़ने के बाद आईसीयू में भर्ती कराया गया है। हबीबा ने अस्पताल से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भावुक अपील करते हुए वार्ता करने की मांग की। उनके मुताबिक, उनकी भूख हड़ताल का 14वां दिन है। लंबे समय से जारी अनशन के कारण उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही है।
आईएएनएस से बातचीत के दौरान हबीबा ने स्पष्ट किया कि हाल में हुए पुतला दहन कार्यक्रम में वह शामिल नहीं थीं और न ही वह इस तरह के किसी कार्यक्रम में शामिल होना चाहती हैं। कांग्रेस के प्रतिनिधि छात्रों के समर्थन में बातचीत की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सोरेन से बातचीत कराने का प्रयास किया जा रहा था। राहुल गांधी ने भी मुख्यमंत्री से बात कर छात्रों की समस्या का समाधान करने की अपील की है।
हबीबा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री की ओर से भी पहले सकारात्मक पहल की गई थी और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की दो बार बातचीत हो चुकी है। अब मुख्यमंत्री की ओर से प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया गया है। ऐसे समय में पुतला दहन करना उन्हें उचित नहीं लगा। वह इसे अपनी सरकार मानती हैं और उन्हें मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार पर भरोसा है। हबीबा ने भावुक होकर कहा कि अगर छात्रों को सरकार से उम्मीद नहीं होती तो वे इतने दिनों तक धरना देने के लिए नहीं बैठते।
हबीबा ने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री की पहचान इसी मिट्टी से है और वह आदिवासी एवं मूलवासी समाज के हितों के लिए जाने जाते हैं। आंदोलन कर रहे छात्र भी इसी राज्य के मूलवासी हैं और उन्हें मुख्यमंत्री से अपनी जायज मांगों को लेकर उम्मीद है। बच्चे अपने अभिभावक से ही अपनी बात मनवाने के लिए जिद करते हैं और इसी उम्मीद के साथ छात्र मुख्यमंत्री से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील कर रहे हैं।
हबीबा ने बताया कि छात्रों का धरना-प्रदर्शन 24वें दिन में पहुंच गया है, जबकि उनकी भूख हड़ताल का 14वां दिन है। लंबे समय तक अनशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उनकी मुख्यमंत्री से बातचीत करने की इच्छा बनी हुई है। उन्हें अनशन या भूख हड़ताल करने का कोई शौक नहीं है और न ही वह इतने दिनों तक भूखे रहने की स्थिति चाहती थीं। छात्रों को जब लगा कि उनकी बातों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है, तब उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
हबीबा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे बातचीत की अपील की। उन्होंने कहा कि वह भी इसी राज्य की बेटी हैं और एक अनशनकारी के रूप में मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखना चाहती हैं। राज्य में जो समस्याएं और कथित अनियमितताएं छात्रों को दिखाई दे रही हैं, संभव है कि मुख्यमंत्री को उनकी पूरी जानकारी न हो। ऐसे में वह मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखना चाहती हैं। सरकार भी इस मामले को लेकर गंभीर है और लगातार बातचीत की कोशिश कर रही है।

