Tuesday, August 18, 2026
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गुजरात: ईडी ने फर्जी सरकारी दफ्तर घोटाले में 22 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की

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अहमदाबाद, 17 अगस्त (आईएएनएस)। ईडी ने गुजरात में दाहोद फर्जी सरकारी दफ्तर घोटाले के सिलसिले में 22.70 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति जब्त की है।

अहमदाबाद जोनल ऑफिस के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बताया कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत जब्त की गई संपत्तियां अबूबकर जकीराली सैयद और उनके परिवार के सदस्यों/सहयोगियों की हैं।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में जमीन के सात टुकड़े, म्यूचुअल फंड में निवेश और अलग-अलग बैंक खातों में जमा राशि शामिल है।

ईडी ने गुजरात के दाहोद टाउन ‘ए’ डिवीजन पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी।

यह मामला दाहोद जिले में सिंचाई और जल संसाधन विभाग के छह फर्जी सरकारी दफ्तर बनाने से जुड़ा है। ईडी ने कहा कि आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों का रूप धरा, जाली मुहरें और हस्ताक्षर बनाए, फर्जी दस्तावेज तैयार किए और धोखाधड़ी से सरकारी अनुदान हासिल किया।

ईडी की जांच से पता चला कि आरोपियों ने मिलीभगत करके 121 फर्जी कामों के लिए मंजूरी ली और धोखाधड़ी से सरकारी फंड हासिल किया।

ईडी ने बताया कि गैर-कानूनी तरीके से हासिल किए गए फंड को बैंक खातों के एक जटिल नेटवर्क के जरिए घुमाया गया और बाद में संपत्तियां खरीदने, निवेश करने और अन्य कामों के लिए इस्तेमाल किया गया।

जांच में पता चला कि धोखाधड़ी का पैसा सबसे पहले फर्जी सरकारी दफ्तरों के नाम पर खोले गए 9 बैंक खातों में जमा किया गया था। वहां से, फंड को 18 बीच के खातों (इंटरमीडियरी अकाउंट्स) के जरिए ट्रांसफर किया गया और बाद में आरोपियों से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के 118 अन्य खातों में बांटा गया।

ईडी ने लोगों को सलाह दी कि वे छोटे-मोटे पेमेंट, कमीशन या आर्थिक फायदे के बदले अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेक बुक, इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल, ओटीपी या केवाईसी दस्तावेज किसी के साथ शेयर न करें।

एजेंसी ने कहा कि धोखाधड़ी करने वाले अक्सर ऐसे खातों का इस्तेमाल ‘म्यूल अकाउंट’ के तौर पर करते हैं ताकि साइबर धोखाधड़ी, वित्तीय घोटालों और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों से मिलने वाले गैर-कानूनी पैसे (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को इधर-उधर घुमाया जा सके।

ईडी ने कहा कि भले ही खाताधारक सीधे तौर पर धोखाधड़ी में शामिल न हो, लेकिन दूसरों को अपना खाता इस्तेमाल करने देने पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए और अपने बैंक खाते या बैंकिंग क्रेडेंशियल के इस्तेमाल के लिए किसी भी संदिग्ध अनुरोध की तुरंत रिपोर्ट करनी चाहिए।