Tuesday, August 18, 2026
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एफडीए को लगाई फटकार, पीड़ित दुकानदार को 5 लाख का हर्जाना देने का आदेश

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मुंबई, 18 अगस्त (आईएएनएस)। बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को आदेश दिया कि वह पुणे की एक डेयरी और मिठाई विक्रेता को 5 लाख रुपये हर्जाने के रूप में दे। इसके साथ ही मिठाई की दुकान का लाइसेंस 98 फीसदी पालन पाए जाने के बावजूद निलंबित रखने पर कड़ी फटकार लगाई।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अखंड ने 12 जून के निलंबन आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया और वडगांव शेरी स्थित गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स को अपना खुदरा व्यवसाय फिर से शुरू करने की स्वतंत्रता दे दी।

पुणे की गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एफडीए की कार्रवाई को चुनौती दी थी। दुकान के मालिक ने बताया कि एफडीए की कार्रवाई के कारण उसे 8.74 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने एफडीए की नीति को अजीब और दोषपूर्ण बताया। पीठ ने दुकानदार को कारोबार फिर से शुरू करने की अनुमति देते हुए एफडीए को एक महीने के भीतर दुकान मालिक को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा आपकी मंशा सराहनीय है,लेकिन जब आपको 98 फीसदी अनुपालन का पता चला तो लाइसेंस का निलंबन तुरंत रद कर देना चाहिए था। विक्रेता का लाइसेंस 11 जून को हुई फूड पॉइजनिंग की घटना के बाद निलंबित किया गया था। याचिका के अनुसार, 12 जून को एफडीओ ने उसका खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया और बिना सुधार का नोटिस या सुनवाई के व्यवसाय बंद करने का आदेश दे दिया। 13 जुलाई को खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा पुनः निरीक्षण पर उसने 98 फीसदी अनुपालन हासिल कर लिया, लेकिन निलंबन आदेश बना रहा।

15 जुलाई को एफडीए आयुक्त के समक्ष अपील दायर की गई, उस पर निर्णय नहीं हुआ, इसलिए खुदरा विक्रेता हाई कोर्ट पहुंचा। गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स की ओर से अधिवक्ता अभिजीत देसाई ने पुणे के पिंड पंजाब मामले का हवाला दिया, जिसमें हाई कोर्ट ने 16 जुलाई को कहा था कि नए निरीक्षण में 100 फीसदी अनुपालन की पुष्टि होने के बाद निलंबन आदेश स्वतः अमान्य हो जाता है।

न्यायाधीशों ने याद दिलाया कि पहले उन्होंने कहा था कि एफडीए का इरादा सराहनीय है और कम से कम कोई विभाग तो खड़ा हुआ है, लेकिन आप अति कर रहे हैं। 98 फीसदी अनुपालन देखते ही आपको तुरंत लाइसेंस का निलंबन रद्द कर देना चाहिए था। सरकारी कील ने कहा कि निलंबन के खिलाफ याचिकाकर्ता की अपील आ युक्त के समक्ष लंबित है। 11 अगस्त को उस पर सुनवाई पूरी होकर आदेश सुरक्षित रख लिया गया था। लेकिन न्यायाधीशों ने कहा कि यह साफ और सरासर मनमानी और अजीब नीति है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश घुगे ने कहा कि एक बार 98 फीसदी क्लियर कर लेने के बाद आप कहते हैं, अब जाकर अपील दायर करो, यह क्या है? नागरिकों को परेशान करना। कोर्ट ने दुकान की दैनिक कमाई के बारे में पूछने पर देसाई ने बताया कि यह लगभग 25,000 रुपये है। उन्होंने कहा कि अनुपालन की तारीख से 34 दिन हो चुके हैं और लगभग 8.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

कोर्ट ने कहा कि राज्य को अपील लंबित होने का कमजोर बहाना नहीं देना चाहिए था। याचिकाकर्ता द्वारा 98 फीसदी अनुपालन हासिल करने पर निलंबन आदेश को तुरंत रद्द करने का आदेश मिलना चाहिए था। एफडीए की अनुपालन रिपोर्ट को देखते हुए उन्होंने एफडीए को याचिकाकर्ता के नुकसान की भरपाई के लिए 5 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश देना उचित समझा। एफडीए 30 दिनों के भीतर यह राशि हाई कोर्ट में जमा करेगा और याचिकाकर्ता इसे निकालने के लिए स्वतंत्र है।