नीमच, 21 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत’ के संकल्प को जमीन पर उतारते हुए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीएन) की मध्य प्रदेश यूनिट ने वर्ष 2026 में अब तक 100 से अधिक बड़ी कार्रवाई कर नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ अपने अभियान को तेज किया है। सीबीएन के 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 101 मामले दर्ज किए गए और 158 गिरफ्तारियां की गईं।
सीबीएन की कार्रवाई का फोकस केवल नशीले पदार्थों की जब्ती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अवैध उत्पादन, ड्रग लैब, दवाओं के अवैध डायवर्जन, भंडारण और अंतरराज्यीय संगठित नेटवर्क तक कार्रवाई का दायरा पहुंचा है।
अभियान के तहत चार नशीले पदार्थ निर्माण लैब का भंडाफोड़ किया गया, जबकि एक करोड़ से अधिक साइकोट्रॉपिक दवाओं के अवैध डायवर्जन का पता लगाया गया। अवैध गोदामों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ और रसायन जब्त किए गए तथा संगठित नेटवर्क के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
वहीं, 326.402 किलोग्राम अफीम, 31,535.634 किलोग्राम पोस्ता भूसी, 223.700 किलोग्राम गांजा, 1.419 किलोग्राम हेरोइन और 85.249 किलोग्राम मिफेड्रोन जब्त किए गए। इसके अलावा 214.06 किलोग्राम 2-ब्रोमो-4′-मिथाइलप्रोपियोफेनोन और 861.320 किलोग्राम मिफेड्रोन निर्माण में इस्तेमाल होने वाला रसायन भी जब्त किया गया। सीबीएन ने 1,736 वर्ग मीटर अवैध अफीम की खेती को भी कार्रवाई के दायरे में लिया है।
2026 की ये 100 से अधिक कार्रवाइयां बताती हैं कि भारत सरकार की नशे के खिलाफ रणनीति अब ‘डिमांड रिडक्शन’ के साथ ड्रग्स की पूरी सप्लाई चेन पर प्रहार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उत्पादन से लेकर तस्करी और अवैध भंडारण तक नेटवर्क को तोड़ने की यह मुहिम नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार दे रही है।
उप नारकोटिक्स आयुक्त निखिल गांधी ने आईएएनएस को बताया कि नशामुक्त भारत अभियान के तहत केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने पूरे वर्ष निरंतर काम करते हुए 101 मामले दर्ज किए हैं। लगातार चौथे वर्ष हमने 100 केस का आंकड़ा पार किया है और इस बार यह आंकड़ा अगस्त में ही पार कर लिया है। इस दौरान हम लोगों ने 158 गिरफ्तारियां की हैं। हमने वैरायटी ऑफ केसेस किए हैं, जिसमें हम लोगों ने परंपरागत रूप से डोडाचूरा और अफीम के साथ-साथ काफी मात्रा में मेफेड्रोन भी जब्त की है, काफी ज्यादा दवाइयां भी हम लोगों ने जब्त की हैं।
निखिल गांधी ने कहा, ” हम लोगों ने इस साल के दौरान 4 लैब भी ध्वस्त की हैं, जो नशीली दवाइयां बनाने के काम में आती थीं, मुख्यतः एमडी बनाने के काम में आती थीं। इसके अलावा एक लैब हमने जो ध्वस्त की है, वो नकली नशीली दवाइयां बनाने के काम में आती थी। ये हमारी कार्रवाइयां पूरे भारत भर में फैली रही हैं, क्योंकि हमने गया में भी लैब ध्वस्त की है, पुणे में भी लैब ध्वस्त की है। मध्य प्रदेश तो हमारा कोर क्षेत्र है ही है चूंकि ये मध्य प्रदेश इकाई है।”
उप नारकोटिक्स आयुक्त ने कहा, “यह साल हमारा उपलब्धियों से भरा साल रहा है और हमारी उम्मीद है कि हम इस काम को और तीव्रता से आगे बढ़ाते रहेंगे और नशामुक्त भारत के लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहेंगे। अवैध अफीम चूंकि हमारा क्षेत्र अफीम उत्पादक रीजन है, तो यहां अवैध अफीम के मामले में पिछले पुराने वर्षों की तुलना में काफी गिरावट है, चूंकि सरकार के कंट्रोल वगैरह काफी बढ़े हैं। फिर भी कुछ क्षेत्र जहां अवैध रूप से अफीम की खेती होती है। जो नॉर्थ-ईस्ट का रीजन हो गया या झारखंड का रीजन हो गया, वहां से आने वाली अफीम की कुछ खेप और डोडाचूरा की खेप हमने पकड़ी है।”

