Sunday, August 23, 2026
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पीटी के कृष्णसामी ने सदर्न जोनल काउंसिल मीटिंग पर तमिलनाडु के सीएम विजय की ‘चुप्पी’ पर उठाए सवाल

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चेन्नई, 23 अगस्त (आईएएनएस)। पुथिया तमिलगम (पीटी) के संस्थापक के. कृष्णसामी ने रविवार को सवाल उठाया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पिछले हफ्ते राज्य में हुई सदर्न जोनल काउंसिल की बैठक में अपने भाषण के बारे में विधानसभा में कोई विस्तृत बयान क्यों नहीं दिया।

कृष्णसामी ने तमिलनाडु के मंत्रियों की टिप्पणियों की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि ये टिप्पणियां विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों को हल करने के बजाय सोशल मीडिया रील्स और मीडिया का ध्यान खींचने के लिए ज्‍यादा थीं।

उन्होंने एक बयान में कहा कि मंत्रियों से उम्मीद की जाती है कि वे विभागों के लिए अनुदान की मांगों और रोज सामने आने वाले अहम मामलों से जुड़े सवालों का रचनात्मक जवाब दें। इसके बजाय, उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कई जवाब बेमतलब थे और उनका मकसद सवालों से ध्यान भटकाना था। उन्होंने ऐसे जवाबों की तुलना ‘किसी ऐसे व्यक्ति को जवाब देने से की जो पट्टुकोट्टई का रास्ता पूछे और आप उसे नारियल की कीमत बता दें’ से की।

उन्होंने कहा कि लाइव टेलीकास्ट के दौरान तीखी बहस से सोशल मीडिया कंटेंट तो मिल सकता है, लेकिन इससे जनता को कोई फायदा नहीं होता।

कृष्णसामी ने यह भी दावा किया कि सदन की कार्यवाही को नियंत्रित करने की कोशिश करते समय स्पीकर सही और गलत के बीच फंसे हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि लाइव प्रसारण के जरिए लाखों दर्शकों तक पहुंचने के बाद विधानसभा के रिकॉर्ड से मंत्रियों की आपत्तिजनक या जरूरत से ज्‍यादा टिप्पणियों को हटाने का कोई खास फायदा नहीं होता। उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना ‘घोड़े के भाग जाने के बाद अस्तबल में ताला लगाने’ से की और पूछा कि आखिरकार इससे किसे फायदा हुआ।

चेन्नई के पास केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई सदर्न जोनल काउंसिल की बैठक पर कृष्णसामी ने कहा कि यह सम्मेलन बिना पर्याप्त पूर्व सार्वजनिक जानकारी के ऐसे समय में हुआ जब कावेरी जल-बंटवारे का विवाद तेजी से गंभीर होता जा रहा था।

उन्होंने बैठक के दौरान तमिलनाडु को प्रभावित करने वाले अहम अंतर-राज्यीय मामलों पर विजय द्वारा रखे गए रुख पर स्पष्टता की मांग की। इनमें कर्नाटक का प्रस्तावित मेकेदातु जलाशय, कावेरी जल का बंटवारा, केरल का मुल्लापेरियार बांध और तमिलनाडु की जल स्तर को 152 फीट तक बहाल करने की मांग, और पलार नदी को लेकर आंध्र प्रदेश के साथ विवाद शामिल थे।

कृष्णसामी ने कहा कि मुख्यमंत्री को विधानसभा के सामने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी चाहिए थी जिसमें तमिलनाडु का रुख, सम्मेलन में दिए गए तर्क और उसके नतीजे के बारे में बताया गया हो। उन्होंने पूछा कि विजय ने ऐसा बयान क्यों नहीं दिया और इस बात पर हैरानी भी जताई कि विधानसभा में विपक्षी पार्टियां इस मामले पर सवाल उठाने में नाकाम रहीं। उन्होंने मांग की कि सरकार बिना और देरी किए पारदर्शी तरीके से सफाई दे।