कोलकाता, 24 अगस्त (आईएएनएस)। कलकत्ता उच्च न्यायालय की सिंगल जज बेंच ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने डीजीपी कार्यालय को 10 सितंबर को अगली सुनवाई की तारीख तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। पीठ ने यह भी फैसला सुनाया कि तब तक पुलिस रॉय के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकेगी।
अदालत ने आगे कहा कि अगर पुलिस इस बीच कोई जबरदस्ती कार्रवाई करने का प्रयास करती है, तो रॉय को अपने वकील के माध्यम से अदालत का ध्यान आकृष्ट करने का अधिकार होगा।
सोमवार को रॉय के वकील ने अदालत को सूचित किया कि उनके मुवक्किल राज्य पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज किए गए सभी मामलों में जांच में सहयोग कर रहे हैं और जांच अधिकारियों द्वारा बुलाए जाने पर हर बार पेश हुए हैं।
उन्होंने बताया कि रॉय के खिलाफ पहली एफआईआर 5 जून को दर्ज की गई थी, उसके बाद 16 जून को दूसरी एफआईआर दर्ज की गई और उसके बाद और भी मामले दर्ज किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उनके मुवक्किल को परेशान करने के लिए लगभग हर दिन मामले दर्ज कर रही है।
अदालत ने राज्य पुलिस द्वारा रॉय के खिलाफ अब तक दर्ज सभी एफआईआर का विवरण मांगा।
सोमवार को राज्य सरकार के वकील और अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई पर रोक लगाने की अपील की। उन्होंने हवाला दिया कि रॉय के खिलाफ इसी तरह का एक मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि रॉय के माध्यम से एक विशेष बैंक खाते में 20 करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित की गई थी।
राज्य पुलिस ने रॉय के खिलाफ दो मुख्य आरोप लगाए हैं, एक भूमि हड़पने से संबंधित है और दूसरा ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान भर्तियों में अनियमितताओं से संबंधित है।

