SGSU Advertisement
Home अंतर्राष्ट्रीय अगस्त 2026: भारतीय कूटनीति का व्यस्त मास, मध्य एशिया से रूस, चीन...

अगस्त 2026: भारतीय कूटनीति का व्यस्त मास, मध्य एशिया से रूस, चीन और अफगानिस्तान तक सक्रिय रही दिल्ली

0
9

नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। अगस्त 2026 भारतीय कूटनीति के लिहाज से बेहद सक्रिय महीना रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्य एशिया यात्रा से लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर का दो दिवसीय मास्को दौरा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बीजिंग वार्ता, श्रीलंका में द्विपक्षीय परियोजनाओं की समीक्षा और फिलिस्तीन में नए अस्पताल की तैयारी तक नई दिल्ली ने एक साथ विभिन्न मोर्चों पर अपनी कूटनीतिक सक्रियता बखूबी दिखाई।

महीने के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अगस्त से 1 सितंबर तक उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान का दौरा किया। ताशकंद में उन्होंने राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। इसके बाद मोदी बिश्केक पहुंचे, जहां उन्होंने 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया।

मध्य एशिया भारत की कनेक्टिविटी, ऊर्जा और सुरक्षा नीति के लिए लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। एससीओ के मंच पर भारत ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर के साथ-साथ आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सहयोग को प्रमुखता दी।

अगस्त में विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मास्को पहुंचे। 23-24 अगस्त की यात्रा के दौरान उन्होंने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता की और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ ही वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बातचीत की।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी मुलाकात में ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा, हाई-टेक और व्यापार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। यह दौरा ऐसे समय हुआ जब वैश्विक स्तर पर रूस के साथ भारत के आर्थिक संबंधों को लेकर पश्चिमी देशों की नजर बनी हुई है।

अगस्त में भारत-चीन कूटनीति भी महत्वपूर्ण रही। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 25 अगस्त को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वीं सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि बैठक की। दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ द्विपक्षीय संबंधों में आगे बढ़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।

यह संवाद इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद अभी भी रिश्तों का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 5 अगस्त को श्रीलंका की यात्रा की। उन्होंने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके समेत श्रीलंकाई नेतृत्व से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों और भारत की सहायता से चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा की।

दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते को अपडेट करने और सामाजिक सुरक्षा समझौते को आगे बढ़ाने पर भी काम जारी रखा। भारत की ओर से श्रीलंका के बुनियादी ढांचे और पुनर्निर्माण से जुड़े सहयोग को भी इस दौरे में महत्व मिला।

अगस्त में भारत-फिलिस्तीन विकास साझेदारी को भी नया आयाम मिला। दोनों देशों ने वेस्ट बैंक में 200 बिस्तरों वाले सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल और एक व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना से जुड़े समझौते किए।

यह पहल ऐसे समय में सामने आई जब गाजा और व्यापक फिलिस्तीनी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर दबाव में है। भारत ने स्वास्थ्य और मानवीय सहायता के साथ फिलिस्तीनी विकास में अपनी भूमिका जारी रखने का संकेत दिया है।

अगस्त में भारत-पाकिस्तान संबंधों में भी एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के बाहर पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा कुछ अस्थायी ढांचे हटाए जाने के बाद, दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर अनधिकृत ढांचे और बैरिकेड हटाए गए।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे ‘आनुपातिक (प्रपोशनेट) प्रतिक्रिया’ बताया। यह घटनाक्रम दिखाता है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव के बीच छोटी-छोटी प्रशासनिक और राजनयिक कार्रवाइयां भी अब पारस्परिक प्रतिक्रिया का रूप ले रही हैं।

अगस्त की पूरी तस्वीर देखें तो भारत की विदेश नीति में एक स्पष्ट पैटर्न दिखाई देता है, जो ‘एक साथ कई शक्तियों और क्षेत्रों के साथ संवाद’ की पुष्टि करता है। वहीं सितंबर में होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस सक्रिय कूटनीतिक महीने को और बड़ा आयाम देने वाला साबित हो सकता है।